चंडीगढ़। सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने “कोठखाई गैंगरेप’ के संदिग्ध नेपाली मूल के सूरज सिंह(29) की कस्टोडियल डेथ केस में हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन आईजी जहुर हैदर जैदी समेत सभी 8 पुलिसकर्मियाें को हत्या समेत बाकी धाराओं में अधिकतम उम्रकैद की सजा सुनाई है। वहीं सभी को एक-एक लाख रुपये जुर्माना भरने को कहा गया है। इसमें से 90 प्रतिशत जुर्माना मुआवजे के रूप में मृतक के परिवार को दिया जाएगा। सीबीआई कोर्ट की स्पेशल जज अल्का मलिक ने इस सजा का एलान किया। इससे पहले सभी दाेषियों की स्टेटमेंट रिकार्ड की गई जिसमें उन्होंने सजा में नर्मी बरतने की मांग की। हालांकि कस्टोडियल डेथ को बेहद गंभीर अपराध मानते हुए दोषियों को यह सजा सुनाई गई।
कोर्ट ने कहा कि मामले में कस्टोडियल डेथ को लेकर सूरज सिंह के परिवार को मुआवजा मिलना चाहिए। ऐसे में कहा गया है कि शिमला की डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी के सेक्रेटरी नियमाें के तहत मृतक के परिवार के फर्स्ट लीगल हेयर्स(पत्नी व बच्चों) को मुआवजा जारी करने के लिए मामले को देखें।
सजा के बाद सीबीआई कोर्ट रूम में 363 पन्नों की जजमेंट कॉपी के इंतजार में पत्नी के साथ बैठे जैदी ने सीबीआई के पब्लिक प्रोसिक्यूटर अमित जिंदल को मुस्कुराते हुए थैंक्स कहा। सजा के बाद एक ओर जहां बाकी सभी दोषी पुलिसकर्मियों और कोर्ट रूम के बाहर पहुंंचे उनके परिवारों की आंखों में आंसू दिखे वहीं जैदी मुस्कुराते हुए नजर आए। अमित जिंदल के मुताबिक सूरज को पैरों में आई चोटें बेहद गंभीर थी जो जानबूझकर मारी गई थी। डॉक्टरी राय में कहा गया था कि भले ही गंभीर अंगों पर चाेटें नहीं थी मगर यह चोटें किसी की जान जाने के लिए काफी पाई गई थी। जैदी की एसआईटी ने गैंगरेप के आधा दर्जन संदिग्ध पकड़े थे जो आरोपमुक्त हो गए थे। वहीं सीबीआई द्वारा बाद में पकड़े रेप आरोपी का डीएनए मैच हाे गया था और उसे उम्रकैद हुई थी।
फांसी की मांग की:
पब्लिक प्राेसिक्यूटर अमित जिंदल ने कहा कि दोषी समाज के लिए एक खतरा है। जिस तरीके से इन्होंने सूरज सिंह की कस्टडी में पिटाई और टार्चर किया उससे उसकी जान चली गई। वहीं बाकियों को भी जिस तरह टार्चर किया उससे प्रतीत होता है कि उनमें ह्यूमन राइट्स और ह्यूमन लाइफ को लेकर बिल्कुल भी सम्मान नहीं है। ऐसे में इन्हे कानून के तहत सख्त सजा मिलनी चाहिए। साथ ही कहा कि यह अतिगंभीर केस है जिसमें फांसी की सजा मिलनी चाहिए ताकि कस्टोडियल टार्चर और डेथ को रोका जा सके। हालांकि कोर्ट ने इसे अतिगंभीर(रेयरेस्ट ऑफ़ द रेयर) केस नहीं माना। वहीं कहा कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में उम्रकैद के हक में रहा है।
इन धाराओं में मिली सजा:
120 बी- उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माना
302 और 120बी- उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माना
330 और 120बी- 3 वर्ष कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना
348 और 120बी- 1 वर्ष कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माना
195 और 120बी- उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माना
196 और 120बी- 3 वर्ष कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना
218 और 120बी-1 वर्ष कठोर कारावास अौर 5 हजार रुपये जुर्माना
201 और 120बी- 3 वर्ष कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना
सजा से पहले दया के लिए किसने क्या कहा:
जैदी ने कहा कि इसके अलावा उस पर कोई क्रिमिनल केस नहीं है। उसका बेहतरीन सर्विस रिकार्ड रहा है। उसके बच्चे कॉलेज जाते हैं। उसे हापरटेंशन समेत कई बीमारियां हैं। मनोज जोशी ने कहा कि उसका बेहतरीन सर्विस रिकार्ड रहा मगर इस केस से उसकी नौकरी चली गई। वह बीमार रहा और उसकी सर्जरी हो चुकी है। पत्नी की भी सर्जरी हो चुकी है, घर में बीमार माता-पिता हैं। राजिंदर सिंह, सूरत सिंह व रफी मोहम्मद ने कहा कि उनके परिवार उन पर निर्भर हैं। राजिंदर ने कहा कि वह स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स में रहते हुए मणिमहेश यात्रा के श्रद्धालुओं की जिंदगी बचा चुका है। दीप चंद शर्मा ने कहा कि वह 37 सालों से सर्विस में है और उसकी बढ़िया रिपोर्ट रही है। मोहन लाल ने कहा कि वह 18-18 साल आर्मी और पुलिस को दे चुका है। उसने परिवार को देखना है। सूरत सिंह ने कहा कि उसकी अच्छी सर्विस के लिए कई सर्टिफिकेट मिल चुके हैं। बच्चे कॉलेज में हैं, परिवार उस पर निर्भर है।
काेर्ट की टिप्पणी:
जज अल्का मलिक ने कहा कि सभ्य समाज में कस्टोडियल वाॅयलेंस एक गंभीर मसला है और कस्टोडियल डेथ सभ्य समाज में संभवत: सबसे बुरा क्राइम है। संविधान के अनुच्छेद 21 में जीवन और निजी स्वतंत्रता का अधिकार शामिल है। जिसमें सम्मान के साथ जिंदगी जीवन का अधिकार भी शामिल है। यह स्टेट या इसकी फंक्शनरी से टार्चर और हमले से सुरक्षा की गारंटी देता है। अनुच्छेद 21 के तहत मिले इस बेशकीमती अधिकार से दोषियों, अंडरट्रायल, कैदियों को वंचित नहीं रखा जा सकता। काेर्ट से सुप्रीम कोर्ट की एक जजमेंट का हवाला दे कहा कि गिरफ्तारी और पूछताछ को लेकर पुलिसकर्मियों के लिए कई दिशानिर्देश तय किए गए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई प्रिवेंटिव तरीके हैं जिससे नागरिकों के मूलभूत अधिकार कायम रहें। कोर्ट ने इसके बावजूद तेजी से बढ़ने वाले कस्टोडियल क्राइम को लेकर कहा कि पुलिस क्रूर और गलत रूप से अपनी पावर का दुप्रयोग कर रही है। यह मौजूदा केस में भी हुआ है।
कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के बावजूद टार्चर और डेथ के मामले बढ़ रहे हैं, जो बताता है कि कानून से जुड़ी एजेंसियों द्वारा ही मानवाधिकारों की बुरी तरह उल्लंघना हो रही है। यह मौजूदा केस में भी हुआ। ऐसी घटनाएं आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रशासन की विश्वसनीयता को प्रभावित कर रहा है। इस केस में सूरज की मौत पर समाज का न्याय के लिए रोष बढ़ गया जिसमें पुलिस थाने को आग लगा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट जजमेंट के आधार पर कोर्ट ने कहा कि कस्टोडियल क्राइम मौजूदा वक्त में मानव सभ्यता की डार्कर साइड बन गया है। सभी कस्टोडियल क्राइम में गंभीर मसला यह है कि सिर्फ शरीर पर ही दर्द नहीं दिया जाता बल्कि मानसिक प्रताड़ना भी होती है जो व्यक्ति को थाने या लॉकअप की चार दीवारी में सहनी पड़ती है। यह टार्चर मानव सम्मान की नग्न उल्लंघना है। सरकार की फंक्शनरी ही कानून ताेड़ने वाली बन जाती है।
मामला:
केस के मुताबिक 16 साल की स्टूडेंट कोटखाई में 4 जुलाई, 2017 को लापता हो गई थी और दो दिन बाद 6 जुलाई को उसकी लाश हलैला के जंगली क्षेत्र में मिली थी। पोस्टमास्टम रिपोर्ट में उसके साथ रेप की पुष्टि हुई थी। जिसे लेकर पुलिस ने हत्या, रेप व पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। इस घटना से स्थानीय लोगों समेत राज्य भर में गुस्सा फूटा था। ऐसे में गवर्नमेंट द्वारा तत्कालीन आईजी जैदी की अध्यक्षता में एक स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम(एसआईटी) का गठन किया गया था। एसआईटी ने कुल 6 आरोपी गिरफ्तार किए थे। वहीं इनमें से एक आरोपी सूरज की पुलिस कस्टडी में 18 जुलाई, 2017 को शिमला के कोटखाई पुलिस थाने में मौत हो गई थी। गैंगरेप-मर्डर समेत कस्टोडियल डेथ केस की जांच शिमला हाईकोर्ट ने सीबीआई को मार्क कर दी थी।




