चंडीगढ़। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशन(डीबीए) का 14 अक्तूबर से चल रहा “नो वर्क डे’ अब 28 अक्तूबर तक बढ़ गया है। मामला पूर्व सेक्रेटरी नीरज हंस को इंसाफ दिलवाने से जुड़ा है। बुधवार सुबह डीजीपी सुरेंद्र यादव के साथ बार द्वारा गठित कमेटी की उनके आवास पर बैठक के बाद कोर्ट कांप्लेक्स में 12:30 बजे जनरल हाउस बैठक में यह फैसला लिया गया। गैर-इरादतन हत्या केस में आरोपी पूर्व प्रेजीडेंट रविंदर सिंह उर्फ जाॅली समेत अन्य 2 वकीलों की गिरफ्तारी की मांग की जा रही है। जानकारी के मुताबिक डीजीपी ने कमेटी को मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं अब 28 अक्तूबर को फैसला होगा कि काम आगे भी ठप्प रखना है या नहीं। कमेटी मामले में केस आईओ क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर अशोक कुमार से मिल कर पहले ही निष्पक्ष और शीघ्र कार्रवाई की मांग कर चुकी है।
जनरल हाउस में कमेटी मेंबर हरीश भारद्वाज ने कहा कि डीजीपी से मीटिंग में दर्ज केसों में निष्पक्ष, शीष्र व बिना किसी प्रभाव के जांच की मांग की गई। जिसे लेकर डीजीपी ने उचित आश्वासन दिया। वहीं मौके पर डीएसपी(क्राइम ब्रांच) को बुलाया गया। जिसके बाद कमेटी ने डीएसपी के साथ भी एक मीटिंग की। इस दौरान जांच में देरी के पीछे पुलिस ने फंक्शन आदि में व्यस्तता का हवाला दिया। वहीं आश्वासन दिया कि बाकी की जांच जल्द पूरी की जाएगी। कमेटी के मुताबिक डीजीपी ने इस मामले में डीएसपी को आईजी के साथ कोर्डिनेट करने को भी कहा है। नीरज हंस के भाई एडवोकेट हरदीप हंस ने कहा कि पुलिस गैर-जमानती धारा में दर्ज केस में जॉली व अन्य वकीलों की गिरफ्तारी नहीं कर रही है। ऐसे में इनके द्वारा गवाहों को धमकाने, सबूतों से छेड़छाड़ की भी आशंका है।
प्रेजिडेंट ने पूछा, कितने वर्क सस्पेंड के खिलाफ तो उठे सिर्फ 3-4 हाथ:
जनरल हाउस के दौरान मृतक नीरज हंस के भाई एडवोकेट हरदीप ने कहा कि उचित पुलिस कार्रवाई न होने तक अनिश्चितकाल के लिए वर्क सस्पेंड रखा जाना चाहिए। वहीं मार्च निकालने की भी मांग बार से की। हालांकि इस पर सहमति नहीं बनी और वर्क सस्पेंड सिर्फ 28 तक किया गया और मार्च निकालने से पहले पुलिस को कार्रवाई के लिए कुछ वक्त दिया गया है। बार प्रेजीडेंट रोहित खुल्लर ने बार से पूछा कि कितने वकील वर्क सस्पेंड जारी रखने के हक में हैं तो लगभग सभी ने हाथ उठाया। वहीं जब पूछा कि कौन इसके हक में नहीं है तो सिर्फ 3-4 वकीलों के हाथ उठे। वहीं दूसरी ओर वकीलों के कामकाज ठप्प के चलते रोजाना सैकड़ों सिविल-क्रिमिनल केसों में तारीखें ही पड़ रही हैं। कोर्ट में सिविल-क्रिमिनल, दोनों मिला रोजाना 2 हजार से ज्यादा केसों की सुनवाई होती है।
7 अक्तूबर को वकीलों में हुई झड़प की घटना में सेक्टर-36 थाने में 3 एफआईआर दर्ज हुई थी। गैर-इरादतन हत्या केस में बार के पूर्व प्रेजीडेंट रविंदर सिंह जॉली, गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपा व सतीश मोर आरोपी हैं। जॉली की शिकायत पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की एफआईआर में महिला वकील व नवदीप संधू आरोपी हैं। वहीं तीसरी एफआईआर जॉली पर महिला की आबरू भंगित करने के प्रयास को लेकर आपराधिक बल के प्रयोग की है।





