चंडीगढ़। किसी साइबर ठग द्वारा क्रेडिट कार्ड से की गई हजारों रुपये की ट्रांजेक्शन के चलते शिकायतकर्ता का सिबिल स्कोर खराब होने पर कंज्यूमर कमीशन ने एसबीआई कार्ड्स को आदेश जारी किए हैं। कमीशन ने पाया कि एसबीआई कार्ड्स की लापरवाही के चलते संबंधित ट्रांजेक्शन हुई। ऐसे में आरबीआई के दिशानिर्देशों के तहत एसबीआई कार्ड्स इन ट्रांजेक्शन के लिए उत्तरदायी है। इसे आदेश हुए हैं कि इन ट्रांजेक्शन के लिए शिकायतकर्ता से कोई क्लेम या चार्ज न लें। तुरंत शिकायतकर्ता का सिबिल स्कोर बनता चार्ज देकर संबंधित अथॉरिटी से ठीक करवाएं। शिकायतकर्ता को हुई पीड़ा के चलते 10 हजार रुपये हर्जाना व 10 हजार रुपये अदालती खर्च के रूप में भरें। सेक्टर-22ए के चंदन सैणी ने हाईकोर्ट स्थित एसबीआई की ब्रांच समेत को पार्टी बनाते हुए पिछले साल अप्रैल में यह शिकायत दायर की थी।
शिकायतकर्ता का संबंधित ब्रांच में अकाउंट था। शिकायतकर्ता को बैंक ने क्रेडिट कार्ड की सुविधा दे रखी थी। कार्ड से ट्रांजेक्शन के दौरान ओटीपी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाना जरूरी था। 19 सितंबर, 2022 को उनके कार्ड से 2 ट्रांजेक्शन हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि किसी बहरूपिए ने बैंक कर्मियों की मिलीभगत के साथ यह ट्रांजेक्शन की। इसके लिए उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का बैंक रिकार्ड बदला गया। एक ट्रांजेक्शन 28,462 रुपये की पीटीएम एजुकेशन, नाेएडा के लिए हुई। दूसरी 2050 रुपये की मोबिकविक के लिए हुई। इनके लिए शिकायतकर्ता के नंबर पर कोई ओटीपी नहीं आई थी। वहीं उन्होंने रजिस्टर्ड नंबर बदलने की भी कोई प्रार्थना नहीं की थी। इसकी शिकायत उन्होंने बैंक को की। उन्हें पता चला कि उनका नंबर अन्य नंबर के साथ बदल दिया गया था। कार्ड को किसी बहरूपिये ने भी एक्टिव करवा रखा था। इसके बाद 17 सितंबर को जारी नए क्रेडिट कार्ड से भी एक और ट्रांजेक्शन 58 हजार रुपये की हो गई थी। इसकी भी शिकायत दी गई मगर कुछ नहीं बना था। वहीं उन्हें दूसरे क्रेडिट कार्ड का बोगस बिल भी जारी हुआ था।
बहरूपिए द्वारा निकाली रकम न भरने पर शिकायतकर्ता का सिबिल स्कोर भी खराब हो गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक उनकी फर्जी ईमेल आईडी और फर्जी मोबाइल नंबर के जरिए यह सब हुआ। कोई कार्रवाई न होने पर कमीशन में केस दायर किया गया था। बैंक ने जवाब दिया कि एसबीआई कार्ड्स द्वारा कार्ड दिया गया, ऐसे में उनका कोई रोल नहीं था। वहीं एसबीआई कार्ड्स ने कहा कि शिकायतकर्ता ने खुद कहा है कि यह साइबर धोखाधड़ी का मामला है। नुकसान के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।




