23 साल पुराने हत्याकांड में दोषी ने कोरोना काल में पेराेल जंप की थी, अब अंतरिम जमानत पर छूटा

चंडीगढ़। एक व्यक्ति की पत्नी व अन्य व्यक्ति के साथ मिल कर उसके पति के सिर पर रॉड से कई वार कर उसकी हत्या कर सबूत मिटाने के लिए कमरे की सफाई व दीवारों पर नया पेंट करने वाले दोषी को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है। दरअसल उसने प्री-मेच्योर रिलीज की अर्जी दायर की हुई है। 44 वर्षीय दोषी जींद के बजिंदर सिंह ने कहा है कि प्री-मेच्योर रिलीज अर्जी मंजूर होने पर वह चंडीगढ़ राम दरबार कॉलोनी में रहेगा। उसके वकील तेजस अहलावत के मुताबिक वह उम्रकैद की सजा के दौरान जेल में 21 साल, 9 महीने से ज्यादा का वक्त काट चुका है।

21 सितंबर, 2001 को मनीमाजरा थाने में दर्ज हत्या, सबूत मिटाने और कैद में रखने की धाराओं में दर्ज केस में वह वारदात के अगले दिन पकड़ा गया था। 11 अगस्त, 2005 को उसे उम्रकैद की सजा हुई थी। कोरोना काल में उसे 56 दिनों की पेरोल मिली थी जो वह जंप कर गया था। फिर इसी साल 30 मार्च को उसे पीओ सेल ने गाजियाबाद(यूपी) से पकड़ा था। उसके वकील तेजस अहलावत के मुताबिक जब तक उसकी अर्जी पर फैसला नहीं होता तब तक उसे काेर्ट से यह राहत मिली है। वहीं उसकी अर्जी रद्द हाेने की सूरत में उसे सरेंडर करना पड़ेगा।

केस में शिकायतकर्ता मूलरूप से बिहार व मनीमाजरा निवासी ओम प्रकाश था। उसने पुलिस को शिकायत दी थी कि 20 सितंबर, 2001 को बजिंदर और राजबीर सिंह उसके मकान मालिक अजमेर सिंह के मनीमाजरा स्थित घर आए थे। ओम प्रकाश के मुताबिक उसने तीनों के लिए खाना बनाया था। अजमेर रात लगभग 12 बजे सो गया था। वहीं बजिंदर और राजबीर समेत अजमेर की पत्नी बबली शिकायतकर्ता को धमकाते हुए एक रॉड लेकर उसे अजमेर के कमरे में ले गए। बजिंदर ने अजमेर के सिर पर रॉड मारी। इसके बाद बबली अजमेर की टांगे पकड़े रही और राजबीर ने कई बार रॉड से अजमेर के सिर पर वार किए। इसके बाद हमलावर उसकी लाश टॉयलेट ले गए। इसके बाद कमरे से खून साफ किया। टॉयलेट में खून से सने कपड़े फैंके। फिर चद्दर से अजमेर की लाश कवर की। इसके बाद लाश मारूति कार में डाल ले गए।

राजबीर कार चला रहा था। वहीं हमलावर शिकायतकर्ता को धमकी देकर गए थे कि किसी को घटना की जानकारी न दे। इसके बाद सुबह लगभग 4 बजे वह घर को बाहर से बंद कर चले गए थे व दोपहर 3 बजे पेंट लेकर आए और कमरे को पेंट किया। इसके बाद शिकायतकर्ता को बाहर से दूध लाने को कहा। उसने बाहर जा सारी बाद इलाके के प्रधान हरजीत सिंह को बताई। जिसके बाद केस दर्ज कर पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर 14 दिसंबर, 2001को चालान पेश किया था। उसके बाद 11 अगस्त, 2005 को तीनों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था व उम्रकैद की सजा दी थी। कोविड में बजिंदर ने पेरोल अप्लाई की औ उसे 23 जून, 2020 से 16 नवंबर, 2020 तक 56 दिनों की पेरोल मिली थी। पेरोल खत्म होने के बावजूद वह वापस नहीं आया जिसे लेकर दिसंबर, 2020 में उसके खिलाफ जींद में एफआईआर हुई थी।

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