चंडीगढ़। मथुरा जिले के वृंदावन में “तुलसीवन’ प्रोजेक्ट के नाम पर प्लॉट बेचने के नाम पर ठगी के आरोपों में दर्ज केस में आरोपी सेक्टर-41 डी के गुंजन चौधरी की अग्रिम जमानत अर्जी एडिशनल सेशंस जज की कोर्ट ने खारिज कर दी है। उसकी अर्जी के दौरान कोर्ट को बताया गया कि आरोपी पक्ष व शिकायतकर्ता के बीच समझौता हो चुका है। इस पर एडिशनल सेशंस जज संजय संधीर की कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों में समझौता होना ऐसे मामलों को औचित्य साबित नहीं सकता जिसमें प्रोजेक्टस में प्लॉट और फ्लैट बिना मंजूरियों के बेचे जाने की बात हो। ऐसे मामलों पर अगर चैक नहीं रखा तो आगे जाकर इससे समाज का आर्थिक ढांचा प्रभावित होगा। वहीं कोर्ट ने कहा कि अभी शिकायतकर्ता का रोल भी स्पष्ट नहीं है कि क्या वह प्रोजेक्ट के साथ दूसरे लोगों को सेल के लिए जुड़ा हुआ था। मामले में मंजूरियों को लेकर भी फर्जीवाड़े के आरोप हैं। इसे लेकर गहन जांच की जरूरत है।
गुंजन व अन्यों के खिलाफ ईओडब्ल्यू थाने में आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं के तहत 8 नवंबर को केस दर्ज हुआ था। विक्रम शर्मा और उनकी मां विजय शर्मा ने मध्यम लैंड ट्रेड इंडिया कंपनी, नई दिल्ली व सेक्टर-22 ब्रांच ऑफिस समेत इसके डायरेक्टर अनुज डांग, गुरकिरत सिंह समेत मैनेजर गुंजन चौधरी के खिलाफ केस दर्ज करवाया था। आरोपी अनुज 11 नवंबर को गिरफ्तार हुआ था। गुंजन के मुताबिक वह सिर्फ एक कर्मी था और पुलिस जांच में शामिल होने को तैयार है। वहीं पब्लिक प्राेसिक्यूटर ने कहा कि आरोपियों ने शिकायतकर्ताओं को बहकाते हुए इनवेस्ट के लिए कहा मगर न तो पोजेशन दिया और न ही रकम वापस की। इन्होंने तुलसीवन की पूरी जमीन बेच दी और इनके पास प्रोजेक्ट को लेकर मंजूरियां भी नहीं थी।
आराेपियों ने कहा-स्टेट ऑफ आर्ट प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं:
शिकायत के मुताबिक आरोपी रियल इस्टेट के बिजनेस से जुड़े हैं। इनकी फरीदाबाद, चंडीगढ़ और गुरूग्राम में ब्रांच हैं। अनुज, गुरकिरत और गुंजन शिकायतकर्ता के जानकार थे। इन्होंने शिकायकर्ता विक्रम को मथुरा जिले के वृंदावन में तुलसीवन प्रोजेक्ट में इनवेस्ट के लिए कहा। शिकायतकर्ता इनसे सितंबर, 2016 में मिला और उसे आरोपियों ने कहा कि वह तुलसीवन के रूप में स्टेट ऑफ आर्ट प्रोजेक्ट चला रहे हैं। प्रोजेक्ट की मंजूरियों के डॉक्यूमेंट भी शिकायतकर्ता को दिखाए। उन्हें कहा कि एक साल में ही एश्योर्ड रिटर्न मिलेगा। इनके बहकावे में आ शिकायतकर्ता पक्ष ने तुलसीवन में 150 स्क्वेयर यार्ड का प्लॉट बुक करवा दिया जो उन्हें अलॉट हुआ। वहीं फरीदाबाद में सितंबर, 2016 में 6 लाख रुपये में बॉय बैक एग्रीमेंट भी किया।
शिकायतकर्ता ने नवंबर, 2018 में एक साल के लिए 18 प्रतिशत ब्याज पर 1 करोड़ रूपये का निवेश भी किया। शिकायतकर्ता को सिक्योरिटी के रूप में भिवाड़ी(राजस्थान) के संस्कार रेजीडेंसी प्रोजेक्ट में 25-25 लाख के 4 प्लॉट भी दिए गए। वहीं 2500 स्क्वेयर यार्ड प्लॉट भी अलॉट हुआ। आरोपियों के बहकावे में तुलसीवन प्रोजेक्ट में शिकायतकर्ता ने मार्च, 2019 में मां के नाम 1250 स्क्वेयर यार्ड प्लॉट भी भरा। इसके 50लाख रुपये दिए। इस रकम की सिक्योरिटी के लिए भी शिकायतकर्ता को भिवाड़ी में 2 प्लाट दिए गए। आरोपियों के झांसे में आ शिकायतकर्ता ने अपने दोस्तों व परिवार को भी मथुरा और भिवाड़ी प्रोजेक्ट में इनवेस्ट करने की सलाह दी। हालांकि शिकायतकर्ता को आरोपियों ने प्लॉट के पोजेशन नहीं दिए और अप्रैल, 2019 के बाद एश्योर्ड रिटर्न भी देना बंद कर दिया। इसके बाद कोरोना काल में शिकायतकर्ता कोई कार्रवाई नहीं करवा पाया। शिकायतकर्ता के मुताबिक आराेपियों ने तुलसीवन और संस्कार रेजीडेंसी प्रोजेक्ट नहीं बनाए और न ही रिटर्न दी। बाद में शिकायतकर्ता को पता चला कि आराेपियों ने जमीन किसी थर्ड पार्टी को बेच दी और उनकी तरह कई मासूम लोगों से धोखाधड़ी की।




