चंडीगढ़। वर्ष 2013 में पीजीआई के पहले हार्ट ट्रांसप्लांट के 5 महीने में ही फेल होने के बाद दसवां हार्ट ट्रांसप्लांट 20 दिन में ही फेल हो गया। 9 दिसंबर को हिमाचल प्रदेश की जिस 30 वर्षीय युवती को हार्ट लगाया गया था उसकी शनिवार मौत हो गई। वह पीजीआई के कार्डियोलॉजी विभाग के इमरजेंसी में थी। जानकारी के मुताबिक ट्रांसप्लांट के 2 दिन बाद ही युवती की हालत बिगड़ गई थी। परिवार से प्राप्त जानकारी के मुताबिक ऑपरेशन के बाद युवती के ब्रेन में क्लोटिंग हो गई थी। वहीं प्लेटलेट्स गिरने व अन्य कारणों के चलते सर्जरी सर्जरी नहीं हो पाई और उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ गई थी। वह ब्रेन डेड हाे गई थी। शनिवार उसे मृत घोषित करने पर परिवार उसे वापस कांगड़ा(हिमाचल प्रदेश) अपने गांव ले गया।
कार्डियोलॉजी विभाग के हेड डा. यश पाल शर्मा के मुताबिक कई बार ऐसे ट्रांसप्लांट के बाद ब्रेन में क्लॉटिंग की संभावना बढ़ जाती है। ब्रेन में ब्लीडिंग होने जैसे कारणों से मरीज की हालत खराब हो जाती है। वहीं कहा कि बीते दिनों वह छुट्टी पर थे इसलिए संबंधित केस की उन्हें जानकारी नहीं है। इस हार्ट ट्रांसप्लांट से जुड़े डॉक्टर हरकंत सिंह के मुताबिक ब्रेन हेमरेज के चलते युवती की मौत हुई थी। परिवार ने इलाज के लिए सीएम केयर और हिम केयर से आर्थिक लाभ लिया था। इलाज में लगभग 7 से 8 लाख का खर्च आया था। मृतका ग्रेजुएट थी।
कोविड में बिगड़ी थी हालत:
परिवार से मिली जानकारी के मुताबिक रीतिका भारद्वाज(30) की कोविड काल के दौरान वर्ष 2021 में तबीयत बिगड़ी थी और सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी। उसे पहले एम्स, नई दिल्ली में चैक करवाया गया था जिसके बाद पीजीआई से इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने उसके हार्ट ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी जिसके बाद परिवार ने डोनर के लिए पीजीआई में रजिस्ट्रेशन करवाया था। जानकारी के मुताबिक रीतिका को एक 36 साल के एक व्यक्ति का हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ था जिसकी एक्सीडेंट में हेड इंजरी के बाद उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। जानकारी के मुताबिक रीतिका की हार्ट की मांसपेशियां काफी कमजोर हो गई थी और ब्लड अच्छे से पंप नहीं हो पा रहा था। पीजीआई के ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग, कार्डियोलॉजी सर्जरी विभाग, कार्डियोलॉजी और एनेस्थेसिया विभाग की ओर से मिल कर यह ट्रांसप्लांट किया गया था।
पहला ट्रांसप्लांट असफल रहा था:
वर्ष 2013 में पीजीआई में हुए पहले हार्ट ट्रांसप्लांट में मरीज की 5 महीने में ही मौत हो गई थी। अंबाला कैंट निवासी एमएल अरोड़ा(53) का अगस्त, 2013 में ट्रांसप्लांट हुआ था। वहीं जनवरी, 2014 में उनकी मौत हो गई थी। वहीं वर्ष 2020 में एक 13 साल की बच्चे का भी हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ था। जानकारी के मुताबिक हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद 5 साल सर्वाइवल रेट लगभग 60 प्रतिशत है।




