पुलिस के रिकवरी मेमो में स्नैच मोबाइल रियलमी मगर मालखाने में जमा हुआ रेडमी, शिकायतकर्ता बोली-वीवो रिकवर हुआ था; आरोपी बरी

चंडीगढ़। शहर में स्नेचिंग की लगातार हो रही वारदातों के बीच कोर्ट में यूटी पुलिस ऐसे कई केसों को कोर्ट में साबित कर पाने में फेल हाे रही है। एक ताजा केस में मलोया थाना पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े हुए और आरोपी भी बरी हो गया। पुलिस के रिकवरी मेमो में रिकवर मोबाइल गुलाबी/लाल रंग का रियलमी नोट 7 था। वहीं डीडीआर एंट्री के साथ मालखाने में जमा मोबाइल रेडमी नोट 7 प्रो था। यही नहीं शिकायतकर्ता महिला ने कहा कि उसका वीवो का मोबाइल स्नेच हुआ था। एडिशनल सेशंस जज रजनीश गर्ग की कोर्ट ने कहा कि प्रोसिक्यूशन न तो शक के दायरे से बाहर जाकर घटना साबित कर पाया बल्कि आरोपी को घटना से लिंक भी नहीं कर पाया। वहीं मोबाइल की रिकवरी भी साबित नहीं हो पाई। कोर्ट ने पुलिस की स्टोरी पर शक जाहिर करते हुए कहा कि घटना के वक्त शिकायतकर्ता के मोबाइल में सिम नहीं था। कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति बिना सिम कार्ड के मोबाइल नहीं रखेगा।

वहीं कथित रूप से छीने गए मोबाइल की पहचान भी प्रोसिक्यूशन साबित नहीं कर पाई। मोबाइल का बिल पेश नहीं हो सका। इसके अलावा गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास है। ऐसे में आरोपी मलोया निवासी विनोद को बरी कर दिया गया। उसके खिलाफ 25 जुलाई, 2022 को मलोया थाना पुलिस ने स्नेचिंग और रिकवरी का यह केस दर्ज किया था। पुलिस केस के मुताबिक मलोया की सिंधू सुबह 11 बजे बेटे को कंप्यूटर क्लास के बाद गुरुद्वारा पार्क के पीछे से घर जा रही थी। मोबाइल उनके बेटे के हाथ में था। आरोपी साइकिल पर आया और बेटे से मोबाइल मांगा। बेटे ने मना किया तो आरोपी उसके हाथ से छीन भाग गया। उसमें सिम कार्ड नहीं था। यह गुलाबी/लाल रंग का रियलमी नोट 7 प्रो था। जांच के दौरान उसी दिन केस के आईओ एएसआई मोहिंदर ने आरोपी को पकड़ा और उससे मोबाइल बरामद करवाया जिसे शिकायतकर्ता ने पहचाना। पुलिस के मुताबिक खुफिया जानकारी के आधार पर मलोया के सत्संग भवन के पास नाका लगा आरोपी को डंपिंग ग्राउंड की तरफ से आते हुए पकड़ा था।

वहीं क्राॅस के दौरान महिला ने कहा कि उसे पुलिसवालों ने थाने में मोबाइल दिया था। वह घटना वाली दोपहर 12 से 1 के लगभग डंपिंग ग्राउंड गई थी। तब वहां कोई न था। तभी 3-4 लड़के सत्संग भवन के पास आए और मोबाइल छीना था। वह पुलिस के साथ कहीं नहीं गई। थाने में पुलिस ने 3-4 पेपर्स पर साइन लिए थे। न उसने स्कैच बताया था और न आरोपी का हुलिया बताया था। आरोपी उनमें से नहीं जिन्होंने मोबाइल छीना था। न उसकी मौजूदगी में मोबाइल रिकवर हुआ और न उसे दिखाया गया। पुलिस के मुताबिक मलाेया गुरूद्वारे के पीछे स्नेचिंग की कॉल आई थी। महिला के मुताबिक मोबाइल उसके पति ने 4-5 साल पहले खरीदा था और घर शिफ्टिंग के दौरान बिल गुम गया था। एएसआई मोहिंदर के बयानों के मुताबिक आरोपी की निक्कर की जेब से रेडमी मोबाइल बरामद हुआ जो मौके पर शिकायतकर्ता ने पहचाना था।

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