पंजाब-चंडीगढ़ में करोड़ाें के काऊ सेस के बावजूद हादसे और डॉग बाइट, कमीशन ने मांगी रिपोर्ट

चंडीगढ़। करोड़ों का काऊ सेस वसूले जाने के बावजूद आवारा पशुओं के चलते सड़कों पर होने वाले हादसों व डॉग बाइट केसों पर पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन ने संज्ञान लिया है। कमीशन ने एडवोकेट नवकिरण सिंह की शिकायत पंजाब के लोकल बाॅडीज विभाग के सेक्रेटरी व चंडीगढ़ के होम सेक्रेटरी को भेेजे जाने के आदेश दिए हैं ताकि वह मामले को देख केस की अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले अपनी रिपाेर्ट दे सकें। 28 मार्च को मामले में सुनवाई होेगी। कमीशन के चेयरपर्सन जस्टिस संत प्रकाश ने यह आदेश जारी किए हैं। पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन में पंजाब सरकार और यूटी प्रशासन को पार्टी बनाते हुए यह शिकायत दायर की गई है। शिकायत में कहा गया है कि पंजाब सरकार व चंडीगढ़ प्रशासन आवारा पशुओं और कुत्तों की समस्या को उचित ढंग से हल करने में नाकाम साबित हो रहा है। ऐसे में लोगों के बुनियादी अधिकारों की उल्लंघना हो रही है। इनके जरिए सड़कों पर हाेने वाले हादसों में लोगों की जान भी जा रही है और लोग घायल भी हो रहे हैं। पंजाब व चंडीगढ़ में काऊ सेस भी लिया जाता है ताकि जानवरों का कल्याण हो सके और पशु सड़कों पर न आएं, जिनसे हादसे होते हैं।
आरटीआई में खुलासा, करोड़ों का काऊ सेस वसूला गया:
आरटीआई जानकारी का हवाला देते हुए कहा गया है कि वर्ष 2018-19 में 27 करोड़ काऊ सेस पंजाब सरकार ने इकट्‌ठा किया था। वहीं 2019-20 में 29 करोड़ से ज्यादा का सेस और 2021-22 में 29 करोड़ से भी ज्यादा का काऊ सेस इकट्‌ठा हुआ था। इसका उचित रूप से पशुओं के लिए इस्तेामाल नहीं किया जा रहा। यही नहीं, राज्य सरकार द्वारा वित्तिय सहायता के बावजूद आवारा पशु सड़कों पर घूम रहे हैं जिनसे हादसे हो रहे हैं। दूसरी ओर आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। न्यूज कटिंग का हवाला देते हुए कहा गया है कि मोहाली जिले में 11 महीने में 6462 डॉग बाइट मामले मोहाली में आए हैं। वहीं चंडीगढ़ में वर्ष 2023 में डॉग बाइट के 10,621 केस आए थे। सुझाव दिया गया है कि पंजाब-चंडीगढ़ की एमसी आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए ज्यादा लोगों की तैनाती करें। वहीं गोशालाओं के अलावा एनिमल पाेंड स्थापित हों। काऊ सेस का इस्तेमाल पारदर्शी हो। पब्लिक प्लेस पर आवारा पशुओं के घुमने पर एमसी अफसरों को निजी रूप से जिम्मेदार बनाया जाए।

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