चंडीगढ़। अपनी लगभग 5 साल की सौतेली बेटी को बोरी में डाल पिटाई करने के मामले में आरोपी महिला पर गैर-इरादतन हत्या के प्रयास की धारा साबित नहीं हो सकी। उसे एडिशनल सेशंस जज की कोर्ट ने चाेट पहुंचाने और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत अधिकतम 1 साल कैद की सजा सुनाई। हालांकि कानूनी प्रावधानों के तहत उसकी सजा सस्पेंड कर छाेड़ दिया गया और दोषी को जमानत दे दी गई। सेक्टर-27डी की जसप्रीत कौर के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75, चोट पहुंचाने और में इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस ने आरोपी महिला के पति मनमोहन सिंह की शिकायत पर दिसंबर, 2017 मंे केस दर्ज किया था। 2 अप्रैल, 2018 को आरोपी को कोर्ट से जमानत मिली थी। मनमोहन सिंह की पहली पत्नी की मौत के बाद उन्होंने जसप्रीत से मई, 2016 में शादी की थी। उनका 13 साल का बेटा और 5 साल की बेटी थी। वहीं शादी के बाद जसप्रीत कौर से भी एक बच्ची हुई थी। मनमोहन सेक्टर 22 में जॉब करते थे, घर पहुंंच पड़ोसी उन्हें बताते थे कि जसप्रीत ने उनकी बेटी की पिटाई की है।
अप्रैल, 2017 में मनमोहन से चुपके से एक वीडियो बनाई थी जिसमें उसकी पत्नी बच्ची से दुर्व्यवहार कर रही थी। बैग में डाल उसे जोर से बैग को हिलाया। इसके बाद बच्ची के पैर में फ्रैक्चर आ गया था और पलस्तर चढ़ा। मई, 2017 में भी ऐसी घटना घटी। पुलिस को बताने से पहले आरोपी ने माफी मांग ली। कुछ महीने बाद फिर से आरोपी ने बच्ची को पीटना शुरू कर दिया। पुलिस ने एक वीडियो के आधार पर दिसंबर, 2017 में एफआईआर की थी। बचाव पक्ष के वकील मंजीत सिंह ने दलील दी कि एक पुरानी घटना में कई महीने बाद एफआईआर की गई। जिस वीडियो क्लिक के आधार पर कार्रवाई की गई उसमें कोई तारीख और दिन तक नहीं था। फोरेंसिक एक्सपर्ट ने इसे प्रोसेस्ड व्हट्सएप क्लिक बताया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक 24 सितंबर, 2017 को उनकी बेटी की पिटाई की गई। वह 10.15 बजे उसे हाॅस्पिटल लेकर गया जबकि रिकार्ड में पेशेंट एब्सकांडिंग बताया गया। सिर्फ एमएलआर के लिए यह बच्ची एडमिट करवाई गई। जबकि शिकायतकर्ता ने इस तथ्य को छुपाया कि उसी रात 12.15 बजे जसप्रीत कौर हेंगिंग केस में एडमिट हुई थी। 5 दिन वह आईसीयू में रही।




