चंडीगढ़। शादी के 19 साल बाद पति पर दो महिलाओं से अवैध संबंध और रॉड से पिटाई की एफआईआर करवाले वाला केस कोर्ट में साबित नहीं हो सका। एसएसपी को शिकायत देने के बाद सेक्टर-25 निवासी के खिलाफ महिला से क्रूरता(आईपीसी 498ए) के तहत विमन पुलिस स्टेशन, सेक्टर-17 में सितंबर, 2017 में यह केस दर्ज हुआ था। महिला की आरोपी से 1998 में शादी हुई थी और यह शिकायतकर्ता की दूसरी शादी थी। आरोप के मुताबिक 2014 में आरोपी ने उसके साथ घरेलू हिंसा शुरू कर दी और झगड़े करता हुआ मारपीट करने लगा था। शिकायतकर्ता को पता चला कि उसके पति के किसी अन्य महिला से संबंध हैं और उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें उसने मोबाइल में भी देखी थी। उसके बारे में पूछने पर आरोपी ने उसकी कई बार पिटाई की। वहीं एक अन्य महिला से भी आरोपी के संबंध थे। उसके बारे में पूछने पर आरोपी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया और गुस्सा हो जाता था।
19 फरवरी, 2015 को आरोपी ने उसे रॉड से पीटा और वापस नहीं आया। जुलाई, 2015 में शिकायतकर्ता को पता चला कि आरोपी दूसरी महिला के साथ रह रहा है। वहीं कई नंबरों से उसे धमका रहा था। बाद में उस पर एफआईआर हुई। वहीं आरोपी ने कहा कि दहेज की मांग का कोई सबूत नहीं है और मारपीट के झूठे आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता महिला ने कहा था कि यह उसकी दूसरी शादी थी जो बेहद सादी थी और कोई सामान आरोपी को नहीं दिया गया था। वहीं पाया गया कि 19 फरवरी, 2015 की पिटाई व चोटों से जुड़ा कोई सबूत नहीं है। इस घटना को लेकर कोई अन्य गवाह प्रोसिक्यूशन ने पेश नहीं किया। वहीं मानसिक प्रताड़ना के आरोप साबित करने को लेकर भी अन्य महिलाओं से संबंध का कोई सबूत केस में नहीं था। वह मोबाइल भी पेश नहीं किया गया जिसमें शिकायतकर्ता ने कथित रूप से पति को अन्य महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा था। ऐसे में आरोपी पति के खिलाफ केस साबित न होता देख उसे बरी कर दिया गया।




