चंडीगढ़
होम गार्ड के फीडर कैडर से 2017 में योग्यता पूरी करने के बावजूद कंपनी कमांडर बलबीर सिंह को डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होम गार्ड प्रमोट न करने पर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने प्रशासन को फटकार लगाई है। कैट ने कहा- ऐसा लगता है यह सब चंडीगढ़ में डीएसपी की पोस्टें बढ़ाने के लिए किया गया। होम गार्ड कैडर के जवानों के प्रमोशन के रास्ते बंद कर दिए गए। फीडर कैडर को क्या प्रमोशन के रास्ते नहीं दिए गए? यह संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 की उल्लंघना है। कैट ने कहा कि पोस्ट के संदर्भ में 1988 के वास्तविक रूल्स में बदलाव किए बिना सिर्फ इनकैडरमेंट करना वैध नहीं है, कानूनी रूप से भी स्थाई नहीं है। कैट ने प्रशासन समेत अन्य को आदेश दिए हैं कि वर्ष 1988 के नियमों के तहत डीपीसी होल्ड करें जिसमें संबंधित पोस्ट के लिए अर्जीकर्ता पर विचार करें। 8 सप्ताह में इस कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। वहीं सक्षम अथॉरिटी 4 सप्ताह में फैसला लेकर 6 सप्ताह में अर्जीकर्ता को प्रमोट करे।
डीपीसी होल्ड करने में हुई देरी के कारण नवंबर, 2017 में योग्य हो जाने के बावजूद अर्जीकर्ता को प्रमोशन के मौके से पिछड़ना पड़ा। मौजूदा केस में डीपीसी में देरी हुई, फिर पोस्ट खत्म की गई, फिर बनाई गई और इन-कैडर कर दी गई। कैट ने सुप्रीम कोर्ट के ओ.जैड हुसैन केस में दिए फैसले को आधार बनाकर कहा कि प्रमोशन पब्लिक सर्विस में सामान्य घटना है जो सेवा में कार्यक्षमता बढ़ाता है। अर्जीकर्ता ने केंद्र, यूपीएससी, यूटी प्रशासन के प्रिंिसपल सेक्रेटरी (होम) तथा डीजीपी काे केस में पार्टी बनाया था। मांग की गई थी कि विभाग को आदेश दिए जाएं कि डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) होल्ड करें।
कैट ने आगे कहा कि वर्ष 1988 के नियमों के तहत हायर पोस्ट पर प्रमोशन का प्रावधान था। इसके तहत आखिरी प्रमोशन 1998 में हुई थी। अर्जीकर्ता भी प्रमोशन का हकदार है। पोस्ट इन-केडर कर फीडर कैडर काे प्रमोशन का अवसर न देना सर्विस कंडीशन में बदलाव है और कुदरती न्याय के सिद्धांतों की उल्लंघना है। अर्जीकर्ता रूल्स के तहत इस पोस्ट के लिए वर्ष 2017 में ही योग्य हो गए थे। पोस्ट भरी नहीं गई और फिर खत्म कर दी गई। इसके बाद एमएचए की मंजूरी पर फिर से पोस्ट का गठन हुआ और मार्च, 2020 से खाली पड़ी थी और कोई डीपीसी होल्ड नहीं की गई। डीजीपी तक को कई रिमांइडर भेजने व सिफारिश के बावजूद काेई कार्रवाई नहीं हुई। जनवरी, 2021 के बाद अर्जीकर्ता के केस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अक्तूबर, 1999 में अर्जीकर्ता होम गार्ड इंस्ट्रक्टर नियुक्त हुए थे। मई, 2006में वह प्लैटून कमांडर बने। जिसके बाद कंपनी कमांडर प्रमोट हुए थे। नवंबर, 2012 से वह इस पोस्ट पर हैं।
अर्जीकर्ता के मुताबिक डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट की पोस्ट के लिए वह 5वर्ष की न्यूनतम योग्यता पूरी कर चुके हैं। यूपीएससी ने इस पोस्ट के लिए उनके नाम की सिफारिश भी की थी। प्रमोशन के लिए यूटी के कमांडेंट जनरल होम गार्ड-कम डीजीपी तक को लिखा मगर कुछ कार्रवाई नहीं हुई। पंजाब होम गार्ड एंड सिविल डिफेंस सर्विस रूल्स, 1988 के तहत भी वह इस प्रमोशन के हकदार हैं। वहीं प्रशासन ने जवाब दिया कि पंजाब पुलिस सर्विस रूल्स की जगह डीएसपी, पुलिस डिपार्टमेंट यूटी ऑफ चंडीगढ़ रिक्रूटमेंट रूल्स, 2021 लागू हैं। अक्तूबर, 2020 में डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट, होम गार्ड गुरबचन दास की रिटायरमेंट के बाद योग्य उम्मीदवार की गैर-मौजूदगी में कई डीएसपी इस पोस्ट पर ट्रांसफर व एडिशनल चार्ज के आधार पर रहे हैं। केंद्र के अप्रैल, 2017 के आदेशों के आधार पर जनवरी, 2020 में डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट, होम गार्ड की पाेस्ट खत्म कर दी गई थी। ऐसे में अर्जीकर्ता का इस पोस्ट पर दावा करने का अधिकार नहीं है।




