विभाग एक मां और सरकारी कर्मी होने के रूप में पूरी तरह नहीं देख सका जो अपनी नौकरी भी करना चाहती थी और बीमार बच्चे को भी नहीं छोड़ना चाहती थी:कैट

चंडीगढ़। बाइ-पोलर मैनिएक डिसआर्डर से पीड़ित बेटे की बेंगलुरू में ट्रेनिंग के दौरान छुटि्टयां अप्लाई करने के बावजूद सेंट्रल जीएसटी कमिश्नर(लुधियाना) में सुपरिटेंडेंट को अवैध रूप से गैरहाजिर रहने व सैलरी काटने की कार्रवाई को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने गलत बताया है। कैट ने पाया कि 30 नवंबर, 2021 की डिपार्चर रिपोर्ट मिलने के बाद भी अगले 2 महीने तक कार्रवाई नहीं की। वहीं अर्जीकर्ता को बताया तक नहीं कि उनकी छुटि्टयां रद्द हो गई हैं। 2021 में उनके बेटे को बेंगलुरू में ट्रेनिंग पर जाना था। उस वक्त देश धीरे-धीरे कोरोना से उबर रहा था। वह महत्तवपूर्ण वक्त में यह एक मां के लिए मुश्किल भरा था कि बेटे को इतनी दूर अकेला छोड़े जो किसी बीमारी से ग्रसित था। छुटि्टयों का कारण पूरी तरह जायज था।

कैट ने हैरानी जताई कि सीजीएसटी ऑडिट कमिश्नरेट, लुधियाना के कमिश्नर ने छुटि्टयों के इस केस को अर्जीकर्ता के बेटे की मेडिकल दिक्कत को देखते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार क्यों नहीं किया। वह अर्जीकर्ता को एक मां और सरकारी कर्मी होने के नाते पूरी तरह नहीं देख सके जो अपनी नौकरी भी करना चाहती थी और बीमार बच्चे को भी नहीं छोड़ना चाहती थी।
बेटे के साथ रहने के लिए उन्होंने लीव विदाउट पे तक अप्लाई कर दिया। इसके बावजूद उस ढंग से उनकी लीव अर्जी को डील नहीं किया जिस तरह से करना चाहिए था। अर्जी के लिए मंजूरी मांगे जानेे के बाद पर्याप्त समय के बावजूद इस पर विचार नहीं हुआ। ऐसे मामलों में लीव अवधि को अवैध रूप से गैरहाजिर नहीं माना जाना चाहिए। लीव के लिए लगाए गए मेडिकल सर्टिफिकेट को विभाग ने चुनौती नहीं दी थी। छुटि्टयोें को अवैध रूप से गैरहाजिर नहीं माना जा सकता। विभाग के 8 जून, 2022 के आदेश को रद्द कर दिया गया। सीजीएसटी ऑडिट कमिश्नरेट, लुधियाना के कमिश्नर को आदेश दिए गए हैं कि केस में दिए गए आब्जर्वेशन के आधार पर छुटि्टयों पर 2 महीने में फैसला लें।

सेंट्रल जीएसटी कमिश्नर (लुधियाना) ऑफिस में सुपरिटेंडेंट तृप्त कौर ने केंद्र सरकार, कस्टम प्रिवेंटिव जोन , नई दिल्ली के चीफ कमिश्नर व अन्य को पार्टी बनाते हुए यह अर्जी दायर की थी। मांग की गई थी कि पार्टी बनाए अफसरों को आदेश दिए जाए कि उनकी 225 दिनों की अर्न्ड लीव व एक्स्ट्रा आर्डिनरी लीव की मांग से जुड़ी अर्जी को मंजूरी/विचार किया जाए। अर्जीकर्ता ने इस छुट्टियों के पीछे अपने बेटे की मेडिकल कंडीशन को आधार बनाया था। वहीं मांग की गई कि 8 जून, 2022 के एक आदेश को रद्द किया जाए जिसमें विभाग ने उन्हें अवैध छुटि्टयों पर पाया गया था। इसके अलावा उनकी जनवरी, 2022 से अभी तक की सैलरी जारी की जाए। मई, 1994 में अर्जीकर्ता इंस्पेक्टर नियुक्त हुई थी और सितंबर, 2024 में सुपरीटेंडेंट प्रमोट हुई थी। उन्होंने 1, दिसंबर, 2021 से 29 मई, 2022(180 दिन) व लीव विदाउट पे 30 मई, 2022 से 12 अगस्त, 2022(75 दिन) तक की छुटि्टयां अप्लाई की थी।

उनका बेटा 2012 से बाइ- पोलर मैनिएक डिसआर्डर से पीड़ित है और हर वक्त देखभाल की जरूरत होती है। उन्होंने बेंगलुरू जाने से एक महीना पहले छुटि्टयाें के लिए अप्लाई किया था। 30 नवंबर, 2021 को उन्होंने मेडिकल अर्जेंसी के चलते डिपार्चर रिपोर्ट भी भेजी थी। 1 फरवरी, 2022 को उन्हें लेटर मिली जिसमें उन्हें अवैध रूप से छुटि्टयों पर पाया गया और कहा गया कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। 17 फरवरी को उन्होंने एक मांग रखी कि उनकी अर्न्ड लीव को एक्स्ट्रा आर्डिनरी लीव में बदल दिया जाए और लीव विदाउट पे कर दें क्योंकि विभाग पहले ही उनकी सैलरी रोक चुका था। मार्च, 2022 में विभाग ने अर्जीकर्ता का जवाब असंतोषजनक पाया। उनकी 2022 में छुटि्टयों की मांग यह कहते हुए मंजूर नहीं की गई कि वह पहले अवैध रूप से छुटि्टयों पर थी। अर्जी में छुटि्टयों की अवधि को अवैध रूप से गैरहाजिर रहने और 1 दिसंबर, 2021 से 31 मई, 2022 तक की सैलरी जारी न करने को निरंकुश और गैरकानूनी कार्रवाई बताया था।

Share it :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!