80 साल की बुजुर्ग को 3 साल की बजाय 12 साल प्रीमियम वाली पॉलिसी देना पड़ा महंगा, कमीशन बोला-शिकायतकर्ता की मेहनत की कमाई हड़पने की अनुमति नहीं दी जा सकती

चंडीगढ़

80 साल से ज्यादा की बुजुर्ग महिला को उनकी मांग के अनुरूप 3 साल की पॉलिसी की बजाय 12 साल की पॉलिसी जारी करने व बाद में रिफंड न देना पीएनबी मेट लाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को महंगा पड़ा है। डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन ने इसे यह पॉलिसी प्रीमियम 9 प्रतिशत ब्याज समेत भरने को कहा है। कमीशन ने कहा कि यह समझ से बाहर है कि शिकायतकर्ता जैसी समझदार महिला, जो उस समय 80 साल से अधिक उम्र की थी और अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में थी, 12 साल की प्रीमियम भुगतान अवधि वाली पॉलिसी लेगी। ऐसे में कहा जा सकता है कि शिकायतकर्ता को आकर्षक चित्र दिखाकर गलत तरीके से यह पॉलिसी बेची गई। प्रतिवादी को शिकायतकर्ता की मेहनत की कमाई को हड़पने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यही नहीं, प्रतिवादी का शिकायतकर्ता को सही पॉलिसी जारी न करना या रिफंड जारी न करना निश्चित रूप से सेवा में कोताही और अनुचित व्यापार गतिविधियों की श्रेणी में आता है।

सेक्टर-34सी की 83 वर्षीय चंद्र कला देहरा ने समेत इसके संबंधित अफसरों को पार्टी बनाते हुए यह शिकायत दायर की थी। शिकायतकर्ता व उनके पति ने प्रतिवादी के प्रस्ताव को सुन अप्रैल, 2021 में 3 साल की एक पॉलिसी ली थी जिसका साल का प्रीमियम 3 लाख रूपये था। हालांकि 18 मई, 2021 को जब पॉलिसी काॅपी उन्हें मिली ताे यह 12 साल की निकली। वहीं इसमें कई खामियां भी थी। इसकी शिकायत करने पर एक एजेंट आया व पॉलिसी ठीक करने के नाम पर वापस ले गया। हालांकि जुलाई, 2022 में वही पॉलिसी फिर से वापस भेज दी गई। कोई विकल्प न होने पर शिकायतकर्ता पक्ष ने जमा करवाई रकम ब्याज समेत वापस मांगी मगर कोई हल नहीं निकला।

शिकायतकर्ता ने कहा कि वह 83 वर्ष की हैं, ऐसे में प्रेक्टिकली उन्हें 12 साल की पॉलिसी जारी नहीं हो सकती थी। ऐसे में कंज्यूमर कमीशन में केस दायर किया गया। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी एडवाइजर मैनेजर व उनके साथ कार्यरत अन्य कर्मी पेश नहीं हुआ और एक्सपार्टी हो गए। वहीं पीएनबी मेट लाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर व कंपनी की से पेश जवाब में कहा गया कि शिकायतकर्ता की स्वीकृति के बाद ही पॉलिसी दी गई थी। दूसरी ओर शिकायतकर्ता ने कहा कि वह सिर्फ 3 साल की ही पॉलिसी चाहती थी।

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