चंडीगढ़। डीबीए के पूर्व सेक्रेटरी नीरज हंस मौत मामले में वकीलों की स्ट्राइक आम लोगों के लिए दिक्कत बनती जा रही है। 14 अक्तूबर से जारी स्ट्राइक अब 4 नवंबर तक बढ़ गई है। 7 अक्तूबर की घटना के बाद सोमवार चौथी जनरल हाउस बुलाई गई जिसमें स्ट्राइक बढ़ाने का फैसला हुआ। स्ट्राइक के हक में हाउस में मौजूद लगभग सभी वकीलों ने हाथ उठाया। बता दें कि स्ट्राइक के चलते लगातार सिविल-क्रिमिनल केसों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। रोजाना काेर्ट में लगभग 2 हजार केस लगते हैं। ज्यादातर में बिना सुनवाई के तारीखें लग रही हैं। लोग इंसाफ के दरवाजे से निराश लौट रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक बार द्वारा गठित पांच सदस्यीय कमेटी ने जनरल हाउस में बार को बताया कि पुलिस तीनों एफआईआर में उचित ढंग से और तेजी से जांच नहीं कर रही है। कमेठी पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं है। ऐसे में 167 बार मेंबर्स द्वारा अटेंड हाउस ने फैसला लिया कि “नो वर्क डे’ 4 नवंबर को अगले जनरल हाउस तक जारी रहेगा। वहीं डिस्ट्रिक्ट कोर्ट कांप्लेक्टस के बाहर मुख्य सड़क पर मार्च निकालने का भी फैसला हुआ है। साथ ही आदेश जारी हुआ है कि कोई भी वकील अगर नो वर्क डे के दौरान कोर्ट सुनवाई में पेश होता है तो उसे 5 हजार रूपये जुर्माना लगाया जाएगा। तीनों एफआईआर में शामिल वकीलों काे सलाह दी गई है कि वकीलों के चैंबर्स में न आएं। सर्विस ब्लॉक में बैठे वकीलों से भी काम ठप रखने की मांग की गई है।
नीरज हंस मामले में 3 एफआईआर में से एक केस हंस के भाई हरदीप हंस की शिकायत पर बार के पूर्व प्रेजीडेंट रविंदर सिंह उर्फ जॉली, गुरप्रीत सिंह व सतीश मोर पर गैर-इरादतन हत्या का दर्ज हुआ था। दूसरा केस महिला वकील की शिकायत पर जॉली के खिलाफ आबरू भंगित करने के मकसद से हमला करने का दर्ज हुआ था। तीसरा केस जॉली की शिकायत पर महिला वकील व नवदीप संधू पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का दर्ज हुआ था। तीनों केसों में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।




