चंडीगढ़। वर्ष 1990 में टाडा एक्ट में दर्ज केस में आरोपी मूलरूप से फर्रूखाबाद, यूपी के विजय सिंह को एडिशनल सेशंस जज रजनीश गर्ग की कोर्ट ने नियमित जमानत का लाभ दिया है। उसके खिलाफ रॉबरी के प्रयास, ट्रेसपासिंग, आर्म्स एक्ट और टाडा के तहत 23 दिसंबर, 1990 को सेक्टर-31 थाने में केस दर्ज हुआ था। इसके बाद वह 1991 में भगोड़ा हो गया था। कोर्ट ने कहा कि यह जमानत देने का फिट केस है। हालांकि आरोपी के पुराने आचरण को देखते हुए उसे भारी श्योरिटी पर छोड़ने के आदेश जारी हुए हैं। ऐसे में उसे 1 लाख रुपये के पर्सनल बांड भरने को कहा गया है। वहीं कहा है कि वह कोर्ट की मंजूरी के बिना देश छोड़ नहीं जाएगा। वह गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा। साथ ही केस की हर सुनवाई पर मौजूद रहेगा।
वहीं पुलिस को अब 34 साल पुराने इस केस को कोर्ट में साबित करना होगा। मामले मेंं आरोप तय होने हैं। 1990 में पहली बार गिरफ्तारी के बाद 5 महीने और 22 दिन जेल काटने के बाद उसे जमानत मिली थी। बाद में वह भगोड़ा हुआ और 30 नवंबर, 1991 को भगाेड़ा करार दिया गया था। 2मई, 2024 को गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में था और अब फिर बाहर आया है। जानकारी के मुताबिक गिरफ्तारी के दौरान वह 23 साल का था। 1990 के इस केस में पुलिस ने कुल 11 गवाह रखे थे। इनमें सेक्टर-31 थाना एसएचओ बीएस नेगी भी थे। विजय घटना के वक्त हल्लाेमाजरा में रह रहा था। उससे देसी पिस्टल और 4 कारतूस मिलने का दावा किया गया था।
राम दरबार, फेज-2 की यह घटना थी। श्रीराम जी दास नामक राम दरबार कॉलोनी का व्यक्ति शिकायतकर्ता था। पेशे से टेलर शिकायतकर्ता का कहना था कि आरोपी लूट की नियत से रूमाल से मुंह ढंक कर उसके घर में शाम 7:45 बजे घुसा और सीने पर पिस्टल लगा दी। शिकायतकर्ता के हाथ मारने पर पिस्टल गिर गई और आरोपी भागने लगा जिसे काबू किया गया था। पुलिस ने फरीदाबाद से उसकी गिरफ्तारी दिखाई थी।




