साबित नहीं हुआ कि डुप्लीकेट चाबी भी नहीं, फिर भी ड्रंकन नाके पर इंपाउंड गाड़ी कैसे चुरा ले गया ऑफेंडर; चोरी-रिकवरी केस में आरोपी बरी

चंडीगढ़। यूटी पुलिस के ड्रंकन ड्राइविंग नाके पर गाड़ी इंपाउंड होने के बाद ऑफेंडर पुलिस पोजेशन से बिना चाबी के गाड़ी कैसे ले गया? यूटी पुलिस इस सवाल का जवाब कोर्ट में नहीं दे पाई। जिसके चलते सोनीपत के सूर्य करण(37) काे सीजेएम सचिन यादव की कोर्ट ने गाड़ी चाेरी और रिकवरी के केस में बरी कर दिया। सेक्टर-17 थाना पुलिस ने दावा किया था कि गाड़ी इंपाउंड होने के 7 दिन बाद 17 दिसंबर को खुफिया जानकारी के आधार पर हरियाणा मिनी सेक्रेटेरिएट के पीछे सड़क किनारे सूर्य करण को इस गाड़ी में बैठे हुए पकड़ा गया। सेक्टर-17 थाना पुलिस ने चोरी और रिकवरी की धाराओं में 10 दिसंबर, 2018 को यह केस दर्ज किया था। केस में शिकायतकर्ता हेड कांस्टेबल दयानंद था। वहीं केस की जांच एसआई मोहिंदर सिंह ने की थी। पुलिस ने सेक्टर-16/17लाइट प्वाइंट की सीसीटीवी फुटेज भी हासिल नहीं की थी और किसी स्वतंत्र गवाह को भी जांच में शामिल नहीं करवाया था। रिटायर इंस्पेक्टर मोहिंदर सिंह ने क्रॉस में कहा कि उन्हें नहीं पता कि आरोपी को चालान के बाद ड्रॉपिंग सुविधा दी गई थी या नहीं। वहीं जींद में रेड की तारीख भी उन्हें याद नहीं थी।

सीजेएम सचिन यादव ने गवाहों के बयान और डॉक्यूमेंट देखने के बाद कहा कि रिटायर एएसआई दयानंद ने क्रॉस-एग्जामिनेशन में माना कि इंपाउंड गाड़ी की चाबी पुलिस के पास रहती है। एसआई अजमेर सिंह ने भी क्राॅस में माना कि गाड़ी इंपाउंड होने पर चाबी पुलिस के पास रहती है। ऐसे में कहा जा सकता है कि संबंधित गाड़ी इंपाउंड होने पर चाबी पुलिस के पास थी। पुलिस शिकायत या प्रोसिक्यूशन के एविडेंस में कहीं नहीं कहा गया कि आरोपी ने पुलिस से चाबी छीनी थी। वहीं गाड़ी के मालिक अशोक कुमार ने कहा था कि गाड़ी की किश्तें चल रही थी और आरोपी ने चंडीगढ़ काम के लिए गाड़ी उनसे मांगी थी। एक चाबी उनके, दूसरी फाइनेंस कंपनी और तीसरी आराेपी के पास थी। ऐसे में कोर्ट ने पाया कि जब गाड़ी इंपाउंड हुई तो आरोपी के पास सिर्फ एक चाबी थी। ऐसे में वह इंपाउंड गाड़ी को कैसे पुलिस पोजेशन से चुरा ले गया। यह पुलिस स्पष्ट नहीं कर सकी। वहीं पुलिस ने यह भी नहीं कहा कि आरोपी से दूसरी चाबी बरामद हुई थी। केस के जांचकर्ता अफसर ने भी कहा था कि आरोपी से चाबी नहीं मिली। इसका मतलब है कि गाड़ी की सिर्फ एक चाबी थी जो चालान के दौरान शिकायतकर्ता ने रख ली थी। ऐसे में दूसरी चाबी की रिकवरी न हाेने पर यह स्पष्ट है कि आरोपी किसी भी हालात में पुलिस कस्टडी से गाड़ी नहीं ले जा सकता था। ऐसे में पुलिस का केस साबित न होने पर आरोपी काे बरी कर दिया गया।

शिकायतकर्ता के मुताबिक 10 दिसंबर को वह और एसआई अजमेर सिंह रात के वक्त सेक्टर-16/17 डिवाइडिंग रोड पर एंट्री-ड्रंकन नाके पर मौजूद थे। रात 9.45 बजे हरियाणा नंबर की गाड़ी आई। इसे सूर्य करण चला रहा था। चैकिंग में उसकी अल्कोहल की रीडिंग 68.1 एमजी आई थी। ऐसे में गाड़ी इंपाउंड कर साइड पर लगा दी गई। सूर्य करण का चालान कर स्लिप पकड़ा दी गई। सूर्य करण नाके के आसपास घूमता रहा। शिकायतकर्ता को अंत में शक हुआ कि सूर्य करण इंपाउंड गाड़ी चुरा ले गया। ऐसे में उसके खिलाफ शिकायत दी गई थी। 17 दिसंबर, 2018 को उसे चोरी की गाड़ी के साथ पकड़ा गया।

इस तरह के बयानों से गिरता गया केस:
रिटायर एएसआई दयानंद ने क्रॉस में कहा कि रात10.30 तक डेढ़ घंटा नाका लगा था। उन्हें नहीं पता कि उन्होंने कुल कितनी गाड़ियां चैक की थी और कितने चालान जारी किए। गाड़ियों के नंबर भी नहीं पता थे। नाके के बाद गाड़ियों को ट्रैफिक लाइन ले जाया गया था। इनकी चाबियां उनके पास ही थी। उन्हें नहीं पता कि आरोपी कब अपनी गाड़ी चुरा ले गया। एसआई अजमेर ने बयान में कहा कि 17 दिसंबर को वह जांचकर्ता अफसर एसआई मोहिंदर के साथ रैन-बसेरा, सेक्टर-17 के पास था। इसी दौरान खुफिया जानकारी मिलने पर आरोपी को सेक्टर-17 मिनी सेक्रेटेरिएट के पीछे से पकड़ा गया। इंपाउंड गाड़ियों की चाबियां हैड कांस्टेबल दयानंद के पास थी। वहीं कहा एक बार कहा कि जांचकर्ता अफसर मौके पर 9.30 पर आया और फिर कहा 10.30 पर आया। मौके के रफ साइट प्लान पर उसने और दयानंद ने साइन नहीं किए थे। उसने भी सूर्य करण को गाड़ी चुराते नहीं देखा था। क्रूजर क्लासिक गाड़ी के मालिक अशाेक कुमार ने बयानों में कहा कि आरोपी ने 10 दिसंबर को गाड़ी चंडीगढ़ किसी निजी काम जाने के लिए ली थी। वहीं कहा कि गाड़ी की दूसरी चाबी उनके घर थी और सूर्य करण को नहीं दी थी। गाड़ी की किश्तें चल रही थी और तीसरी चाबी फाइनेंस कंपनी के पास थी। कांस्टेबल प्रदीप ने बताया कि क्रूजर गाड़ी और उसकी चाबी जांचकर्ता अफसर ने मालखाने में जमा करवा दी थी। उनके अलावा बाकी गवाहों के भी बयान दर्ज हुए थे।

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