रिश्वतकांड में क्लिन चीट के बाद विभागीय जांच में डिमोट हुए इंस्पेक्टर सेखों ने डिमोशन को दी चुनौती

चंडीगढ़। रिश्वत से जुड़े एक मामले में सीबीआई द्वारा क्लिन चीट के बावजूद यूटी पुलिस की विभागीय कार्रवाई में इंस्पेक्टर से एसआई डिमोट होने वाले हरिदर सिंह सेखों ने अपनी डिमोशन को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल(कैट) में चुनौती दे रखी है। इस मामले में कैट ने बहस के बाद अपना फैसला रिजर्व कर लिया है। केस में यूटी पुलिस के अफसरों को पार्टी बनाया गया है। सेखों ने कैट से मांग की है कि दायर अर्जी की पेंडेंसी तक 24 दिसंबर के डिमोशन वाले आर्डर पर स्टे लगाया जाए। पुलिस विभाग ने पंजाब पुलिस रूल्स के तहत सेखों को सजा देेते हुए डिमोट किया गया था। वर्ष 2023 के रिश्वतकांड में सेखों को पुलिस विभाग ने 7 मई, 2024 को चार्जशीट कर 16 दिसंबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सेखों की ओर से कहा गया है कि उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने से लेकर डिमोट करने के आर्डर डीआईजी रैंक से नीचे के अफसर ने लिए जबकि उन्हें डीआईजी ने प्रमोट किया था। अर्जी में सुप्रीम कोर्ट जजमेंट्स को भी सेखों ने आधार बनाया। वहीं मामले में यूटी पुलिस व अन्य की ओर से भी दलीलें पेश की गई।

केस में यूटी की ओर से पैरवी करते हुए सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अरविंद मोदगिल ने कहा कि मौजूदा अर्जी मेंटेनेबल नहीं है क्योंकि सेखों पहले ही 24 दिसंबर के आर्डर के खिलाफ अपील दायर कर चुका है। वहीं रिमांइडर भी भेजा। इसके एक महीने के बाद कैट में 24 जनवरी को यह केस दायर किया गया। वहीं एसएस राठौर बनाम मध्य प्रदेश सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों वाली संवैधानिक बैंच की जजमेंट का का हवाला दे कहा गया कि काेर्ट पहुंचने से पहले सभी वैधानिक उपाय खत्म हो चुके होने चाहिएं। जबकि मौजूदा केस में सेखों की अपील पेंडिंग है।

सीबीआई द्वारा जुलाई 2023 में दर्ज रिश्वत के एक मामले में सेखों के रोल की जांच को लेकर की गई सिफारिश के बाद पुलिस विभाग ने यह कार्रवाई की थी। सीबीआई ने मामले में भाजपा नेता के भाई मनीष दूबे व अनिल गोयल को 3 लाख रुपये रिश्वतकांड में पकड़ा था। फरार हुए हेड कांस्टेबल पवन मार्च, 2024 में पकड़ा गया था। केस में राम दरबार का दीपक केस में शिकायतकर्ता था। दीपक ने शिकायत में कहा था कि ऑपरेशन सेल के तत्कालीन इंचार्ज इंस्पेक्टर सेखों ने उसे एक वसूली केस में फंसाने की धमकी दे 7 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी। हालांकि सेखों का रिश्वतकांड में रोल सामने नहीं आया था। वहीं सीबीआई ने सेखों व उसकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था। सेखों 1997 में एएसआई भर्ती हुआ था। 2005 में वह एसआई बना और डीआईजी आर्डर पर 5 जून, 2015 को इंस्पेक्टर प्रमोट हुआ था।

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