चंडीगढ़। कई बार पुलिस की छवि लोगों के बीच उनके काम और व्यवहार को लेकर खराब रहती है। थानों से इंसाफ न मिलने पर लोगों को अक्सर एसएसपी,डीजीपी तक को शिकायत देनी पड़ती है। मगर यूटी पुलिस की एक नई स्कीम से उम्मीद जागी है कि पुलिसकर्मी अब पूरी तत्परता और ईमानदारी से काम करेंगे। शहर में क्यूआर आधारित सिटिजन रिव्यू सर्विस शुरू की गई है। इसके तहत मामलों में कार्रवाई, उनके व्यवहार, रिस्पांस टाइम, ईमानदारी, पहुंच आदि को लेकर लोग रेटिंग दे सकते हैं। इस डाटा/रैंकिंग के आधार पर पुलिस थानों को हर महीने रैंकिंग दी जाएगी।
इस रैंकिंग को पुलिस वेबसाइट पर भी प्रदर्शित किया जाएगा। जिससे काम में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और बेहतर प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान हो पाएगी। वहीं इससे पता चल पाएगा कि पुलिस को किन क्षेत्रों में काम बेहतर करने की जरूरत है। सिटिजन रिव्यू सर्विस को लेकर कटारिया पुलिस अफसरों से बोले की कई शिकायतें भी आएंगी, घबराने की जरूरत नहीं है। वह बोले कि आजकल सब ऑनलाइन हो गया है जिससे साइबर क्राइम भी बढ़ा है।
लोग सिटिजन रिव्यू सर्विस का लाभ लेने के लिए थानों, समावेश सेंटर्स, पुलिस हैडक्वार्टर और ट्रैफिक लाइन में लगे क्यूआर कोड को लोग स्कैन कर सकते हैं। इसका उद्घाटन शहर के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने यूटी सेक्रेटेरिएट में हुए एक कार्यक्रम के दौरान किया। वहीं उन्होंने साइबर अवेयरनेस कियोस्क का भी शुभारंभ किया। सुखना लेक, सेक्टर-17 प्लाजा और इंडस्ट्रियल एरिया स्थित नेक्सस एलांते मॉल में यह कियोस्क लगाए गए हैं। इसका मकसद साइबर सेफ्टी को लेकर लोगों को जागरूक करना है। इन कियोस्क के जरिए साइबर अपराध की रिपोर्टिंग भी करवाई जा सकेगी। इनके जरिए साइबर सिक्योरिटी टिप्स, नए साइबर क्राइम ट्रेंड्स आम लोग जान पाएंगे। वहीं इनमें इंटरेक्टिव लर्निंग माड्यूल भी होगा। कार्यक्रम के दौरान यूटी पुलिस और यूटी प्रशासन के सभी सीनियर अफसरों समेत आरडब्ल्यूए व मार्किट एसोसिएशन के मेंबर्स व अन्य शामिल थे।
डीजीपी सुरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि केसों की रजिस्ट्रेशन बढ़ने से क्राइम ग्राफ भी बढ़ा हुआ दिखने लगा है। वीजा दिलवाने के नाम पर धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़े हैं। डीजीपी ने पुलिस अफसरों से कहा कि सुबह 10 से शाम 6 तक ही सीमित न रहें। फील्ड में रहें, क्राइम कभी भी हो सकता है।
संगीन मामलों में अफसरों को फोलोअप करना चाहिए: कटारिया
गुलाब चंद कटारिया बोले कि अक्सर गंभीर अपराधों में भी अपराधी छूट जाता है। ऐसे केसों को फोलोअप करने के लिए बड़े अफसरों को ध्यान देना चाहिए। सजा का प्रतिशत बढ़ना चाहिए। कहा कि वह राजस्थान में जब गृहमंत्री थे तो एनडीपीएस मामलों में सजा का प्रतिशत केवल 18से 20 प्रतिशत था। कई राज्यों में यह 10 प्रतिशत से भी कम था। आरोपी की गिरफ्तारी और ड्रग जब्त करने के के बाद भी आरोपी अक्सर छूट जाता है। ऐसे में वहां एक स्कीम चलाई गई थी। कटारिया ने कहा कि लोग बच्चों को पढ़ाने के लिए पूरी उम्र लगा देते हैं। बच्चे अच्छे पैकेज के लिए विदेश चले जाते हैं। बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं। ऐसे में अगर किसी परेशानी में पुलिस को कॉल करने पर तुरंत रिस्पांस मिल जाए तो बड़ी राहत मिल सकती है।




