चंडीगढ़। इंटरनेट के वर्चुअल वर्ल्ड में कई “मारीच’ घूम रहे हैं। इन्हें पहचानना काफी कठिन है। सीता माता भी मारिच को नहीं पहचान पाई थी। मौजूदा वक्त में साइबर ठग उस मारिच की तरह ही हैं जिनसे सावधान रहने की जरूरत है। सतर्कता ही एक उपाय है।आरबीआई के सीजीएम व ओंबुड्समैन राजीव द्विवेदी ने बात कही। वह सोमवार शहर में एक कार्यक्रम के दौरान साइबर ठगी से बचाव को लेकर बता रहे थे। उन्होंने बताया कि डिजिटल ट्रांजेक्शन को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। देश में एक महीने मंें औसतन 1500 करोड़ रूपये की डिजिटल ट्रांजेक्शन होती है। वहीं साइबर ठगों को इसमें से सिर्फ कुछ लोगों को ही अपना शिकार बनाना होता है। उन्होंने बताया कि देश की आबादी भले ही लगभग 145 करोड़ है मगर देश में 230 करोड़ डिपोजिट अकाउंट हैं। वहीं लोन अकाउंट 40 करोड़ के लगभग व 10 करोड़ लोगों के पास क्रेडिट कार्ड हैं। 100 करोड़ लोगों के पास डेबिट कार्ड हैं। औसतन व्यक्ति माह में 10 ट्रांजेक्शन करता है।
उनका कहना है कि उनके पास साइबर फ्रॉड से जुड़ी जितनी भी शिकायतें आती हैं उनमें ज्यादातर केसों में यूजर की लापरवाही होती है। वहीं कहा कि इंटरनेट में भारी मात्रा में इंफोर्मेशन का फ्लो है। इसका अगर प्रिंट निकालने लगें तो 189 साल लग जाएंगे। कनेक्टिविटी विश्वास लायक होनी चाहिए। वेबसाइट फर्जी भी हो सकती है। आरबीआई ने बैंकों को म्यूल अकाउंट्स पर भी नजर रखने को कह रखा है। इन्हीं अकाउंट्स के जरिए ज्यादातर साइबर ठग रकम को आगे तक पहुंचाने में यूज करते हैं। कई बार इन अकाउंट होल्डर्स को पता तक नहीं हाेता कि वह इसमें फंसे हुए हैं।
ऐसे समझिए ठग से कैसे निपटें:
राजीव द्विवेदी ने एक उदाहरण देकर समझाया कैसे रहें सतर्क:
साइबर ठग: असीं एफबीआई तों बोल रहे हां। असी तुहाडे पुत्तर नूं गिरफ्तार कित्ता होया है।
शिकार: एफबीआई दे बंदे पंजाबी कदों तो बोलण लग पए।
ठग: एफबीआई विच पंजाबी बोलण वाले बंदियां दी वी भर्ती कीती जांदी है।
शिकार: एफबीआई दी फुल फार्म दस्सो।(ठग ने कॉल काट दी)
इस तरह बचें:
राजीव द्विवेदी ने केनेडा कॉलिंग फ्रॉड पर कहा कि अगर विदेश में काेई रिश्तेदार दिक्कत में होगा तो वह खुद कॉल करेगा। वह डॉलर मंें रकम मांगेगा न कि किसी के इंडियन अकाउंट में इंडियन करेंसी में रकम मंगवाएगा। कई केसों में ठग लालच देकर संवेदनशील दस्तावेजों की जानकारी हासिल कर लेते हैं और पीड़ित कहता है कि उसने ओटीपी भी शेयर नहीं किया मगर ठगी हो गई। वहीं कई बार अपना सिबिल स्कोर बताने के चक्कर में लोग पूरी संवेदनशील जानकारी दे देते हैं। डिजिटल अरेस्ट केसों को लेकर वह बोले कि सुप्रीम कोर्ट कभी ऐसे व्हट्सएप कॉल पर अरेस्ट वारंट नहीं निकालता। इस ठगी में आरोपी शिकार के दिमाग पर वार करता है। ठगी का शिकार होने पर शुरूआती 90 सेकंड काफी अहम माने जाते हैं। तत्काल पुलिस या आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करवाएं।
सब स्क्रिप्टेड और स्टूडियो में होता है:
डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर राजीव द्विवेदी ने बताया कि साइबर ठग एक स्टूडियो तैयार करते हैं। ड्रेस में ठग को बिठा असली का अफसर दिखा व्हट्सएप कॉलिंग पर लोगों को डरा रकम वसूलते हैं। वहां टीम के मेंबर्स को दिन में 100 के लगभग कॉल्स दी जाती हैं जिसमें उनके अगर 2 शिकार भी बन गए तो उनके लिए बहुत है। वहां कॉलिंग में कई इंटर्न भी होते हैं।





