6.80 करोड़ के फर्जी केस में आरोपी बता 23 दिनों तक 24 घंटे डिजिटल अरेस्ट में रख ट्यूटर से 51.27 लाख ठगे

चंडीगढ़। “डिजिटल अरेस्ट’ के एक अनोखे मामले में 23 दिनों तक 24 घंटे चंडीगढ़ के एक व्यक्ति को साइबर ठगों ने घर में कैद रखा। पूरी रात-दिन तक यह वीडियो कॉल चलती रही। उन्हें झूठे केस में गिरफ्तार करने की धमकी देते हुए 51.27 लाख रुपये की ठगी की गई। यह पैसा शिकायतकर्ता ने अपनी दोनों बेटियों की शादी के लिए जाेड़ कर रखा हुआ था। शातिर अपराधियों ने नकली पुलिसकर्मी बन धमकाया था कि परिवार के साथ भी अगर इस मामले को लेकर जानकारी सांझा की तो उन्हें भी 2-2 साल की जेल हो जाएगी। गिरफ्तारी के डर से शिकायतकर्ता डड्‌डूमाजरा गांव निवासी हरिनाथ सिंह ने किसी को यह बात नहीं बताई और यूपीआई से 2 ट्रांजेक्शन व बैंक जाकर आरटीजीएस से 5 ट्रांजेक्शन कर दी।

2 अक्तूबर से शुरू हुए इस “डिजिटल अरेस्ट’की सच्चाई 24 अक्तूबर की शाम को सामने आई जब शिकायतकर्ता ने पुलिस को इसकी जानकारी दी। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने ट्रांजेक्शन की डिटेल्स लेकर लिखित शिकायत ले ली है और एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।

ठगों ने कहा-करोड़ों के फ्रॉड में फंसे हो, सुप्रीम कोर्ट ने अरेस्ट वारंट निकाला है:
56 वर्षीय शिकायतकर्ता हरिनाथ ने बताया कि 2 अक्तूबर को उन्हें एक नंबर से कॉल आई। काॅलर ने कहा कि उनके आधार नंबर से 30 अगस्त को एक मोबाइल सिम रजिस्टर्ड हुआ था जो एक फ्रॉड केस में जुड़ा है। मुंबई में दर्ज उस केस में एक एफआईआर और 7 शिकायतें हैं। शिकायतकर्ता को कहा गया कि 2 घंटे में वह मुंबई आ जाए। शिकायतकर्ता को कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट से उसके गिरफ्तारी वारंट जारी हुए हैं। कहा कि अगर बचना है तो सहयोग करना पड़ेगा। शिकायतकर्ता घबरा गया और कहा कि वह तो 15 साल पहले एक बार मुंबई गए थे। पहले नार्मल कॉल की गई थी जिसके बाद ठगों ने व्हट्सएप पर विडियो कॉल की। शिकायतकर्ता को पुलिसकर्मी बन ठग ने कहा कि नरेश गोयल नामक व्यक्ति से यह ठगी का केस जुड़ा है जिसमें वह भी आरोपी हैं। उनका कैनरा बैंक में खाता भी खुला हुआ है।

शिकायतकर्ता ने कहा कि उनका ऐसा कोई खाता नहीं है। इसके बाद ठग ने दूसरे ठग को सीबीआई अफसर बताते हुए शिकायतकर्ता की उससे बात करवाई। बाकायदा ठग पुलिस वर्दी में थे। शिकायतकर्ता को घर पर ही रहने व 24 घंटे तक वीडियो कॉल पर कनेक्ट रहने को कहा गया। शिकायतकर्ता इस दौरान घर के बाकी काम करने, परिवार से मिलने के लिए भी ठगों से परमिशन लेकर यह सब करता रहा। वह पेशे से ट्यूटर हैं।

6.80 करोड़ के फर्जी केस में बनाया आरोपी
शिकायतकर्ता को ठगों ने कहा कि उनके नाम 6.80 करोड़ रुपये की फर्जी ट्रांजेक्शन है जिसमें उन्होंने 10 प्रतिशत कमीशन यान 68 लाख रुपये लिए हैं। इस ठगी में बैंककर्मी भी शामिल हैं। ऐसे में उनकी सारी संपत्ति की आरबीआई से जांच होगी। अगर वह सच्चे निकले तो बच जाएंगे वर्ना जेल जाएंगे। ऐसे में जांच के नाम पर शिकायतकर्ता को अपनी व पत्नी का हर तरह का जमा सारा पैसा एक खाते में डलवा कर आगे देने को कहा गया। ऐसे में शिकायतकर्ता से 4 अक्तूबर से लाखों रुपये लेने शुरू किए गए जो 22 अक्तूबर तक लिए जाते रहे।

जांच में क्लीन बता रिफंड और एफआईआर रद्द के नाम पर भी लूटा
लाखों की ठगी का शिकार हो चुके शिकायतकर्ता को 14 अक्तूबर को कॉल के दौरान शिकायतकर्ता को बताया गया कि वह जांच में क्लिन मिले हैं। 16 को एफआईआर कैंसिल करने के लिए 2 लाख और देने पड़ेंगे। फिर रिफंड व एनओसी के लिए 88 हजार और मांगे। इसके 22 अक्तूबर को आरबीआई जांच फीस के रूप में डेढ़ लाख और मांगे। इसके बाद जब 24 को फिर से 2 लाख रुपये की मांग की गई तो शिकायतकर्ता ने हार कर कहा कि उसे गिरफ्तार ही करवा दो। इसके बाद परिवार को इसके बारे में बताया, फिर मलोया थाना और वहां से साइबर क्राइम थाने में शिकायत दी गई।

Share it :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!