चंडीगढ़। यूटी पुलिस के पूर्व डीएसपी(सिक्योरिटी) दीपक सहारन फर्जी आईपीएस अफसर के जिस केस में शिकायतकर्ता थे उसी में उन्होंने जांच भी की। इसे कोर्ट ने कानून की नजर में गलत पाया। इसके अलावा प्राेसिक्यूशन केस में कई गड़बड़ियों के चलते कथित रूप से खुद को ईओडब्ल्यू, दिल्ली का एडिशनल डिप्टी कमिश्नर बताने वाले नकली आईपीएस नजबगढ़, नई दिल्ली के रवि कांत के खिलाफ पुलिस के अपील केस को कोर्ट ने रद्द कर दिया। सेक्टर-26 थाने में रवि कांत पर नकली पुलिस अफसर बनने और धोखाधड़ी करने से जुड़ी धाराओं में 1फरवरी, 2014 को एफआईआर दर्ज की थी। एडिशनल सीजेएम की कोर्ट ने 23 मार्च, 2018 को उन्हें बरी कर दिया था। उसी फैसले को स्टेट ने जुलाई, 2018 में दायर अपील केस में सेशंस काेर्ट में चुनौती दी थी। एडिशनल सेशंस जज अश्वनी कुमार की काेर्ट ने कहा कि मौजूदा केस में पब्लिक प्रोसिक्यूटर ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सका जिसकी ट्रायल कोर्ट ने गलत व्याख्या की हो। यह ट्रायल कोर्ट का सही आब्जर्वेशन था कि प्राेसिक्यूशन संदेह के दायरे से बाहर जाकर केस को साबित करने में बुरी तरह फेल रहा। ऐसे में अपील केस रद्द कर दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि दीपक सहारन नहीं बता पाए कि किस तरह आरोपी ने लोगों को ठगा था। कोर्ट ने कहा था कि जिस डीएसपी ने टीम को फर्जी आईपीएस की जानकारी दी वह आरोपी के पकड़े जाने के दौरान मौके पर नहीं थे। यह अजीब है कि शिकायतकर्ता आराेपी को पहचाने बिना वहां से चला गया। पुलिस यह भी साबित नहीं कर पाई कि आरोपी नकली अफसर लोगों से ठगी के लिए बना था। गवाहों के बयानों में विराेधाभास था और पुलिस नहीं बता पाई कि आरोपी ने यूनिफार्म कहां से ली। कोई स्वतंत्र गवाह केस में नहीं था। शिकायतकर्ता ने खुद केस की जांच की थी जो कानून की नजर में गलत थी।
पुलिस केस के मुताबिक एसआई सुशील कुमार और बाकी पुलिसकर्मी सेक्टर-26 पुलिस लाइंस के पीछे ट्रैफिक प्वाइंट पर पेट्रोलिंग पर थे। तभी डीएसपी(सिक्योरिटी) दीपक सहारन ने आकर बताया कि रवि कांत नामक व्यक्ति फर्जी आईपीएस बना हुआ है। वह खुद को रहा है। वहीं कह रहा है कि वह सीडीटीएस, सेक्टर-36 में ट्रेनिंग पर है। उसके पास चंडीगढ़ नंबर कार है जिसके आगे और पीछे पुलिस लिखा हुआ है। वह दिल्ली का आईपीएस अफसर बन लोगों को ठग रहा है। डीएसपी ने कहा कि वह मनीमाजरा की तरफ से उनसे मिलने आ रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने शाम 5 बजे नाके के दौरान आरोपी को पकड़ा था। पुलिस पूछताछ में वह टूट गया और बताया कि वह आईपीएस की वर्दी पहन लोगों को भर्ती के नाम पर ठगता था। ऐसे में उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने उससे कुछ सर्टिफिकेट, मार्क शीट्स और वर्दी और सफारी गाड़ी बरामद की थी।




