चंडीगढ़ । एक केस में पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक मकान मालिक के किराए से बचने के लिए एक महिला ने उसके बेटों व पड़ोसी पर उसकी नाबालिग बेटी की आबरू भंगित करने के आरोप लगाए। दरअसल मकान मालिक ने किराए के लिए जब कानूनी नोटिस भेजा तो शिकायतकर्ता ने मौजूदा शिकायत दायर कर दी जिसमें मकान मालिक के बेटों पर उसकी नाबालिग बेटी की आबरू भंगित करने के आरोप लगाए। जब पुलिस ने केस न बनता देख कैंसलेशन रिपोर्ट पेश की तो शिकायतकर्ता ने उसका विरोध किया मगर बाद में कोई एविडेंस पेश नहीं की।
वहीं जांच में यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता एक एनडीपीएस केस में शामिल थी। वहीं उसकी बड़ी बेटी ने भी ऐसा ही यौन शोषण का केस दायर किया था मगर बाद में मुकर गई थी। वहीं जांच में सामने आया कि जिस दिन की घटना का जिक्र किया गया तब मकान मालिक के बेटों व पड़ोसी की लोकेशन अपने नोएडा व मोहाली ऑफिस की थी। पूरी जांच के बाद पुलिस ने कैंसलेशन रिपोर्ट दायर की थी।रेप व पोक्साे की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की एडिशनल सेशंस जज यशिका ने कहा कि शिकायतकर्ता और पीड़िता को अपने बयान दर्ज करवाने थे मगर शिकायतकर्ता ने कोई फ्रेश शिकायत दायर नहीं की और न ही अपने पीड़िता के बयान दर्ज करवाए। ऐसे में प्रतीत होता है कि वह केस को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। ऐसे में कैंसलेशन रिपोर्ट स्वीकार करने के अलावा कोइ्र विकल्प नहीं है। ऐसे में पुलिस रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई।यूटी पुलिस ने पीड़िता के नाम से यह यह केस चलाया था।
जांच के बाद पुलिस ने केस न बनता देख 1 मार्च, 2024 को कैंसलेशन रिपोर्ट कोर्ट में फाइल कर दी थी। स्पेशल कोर्ट का मामला होने के चलते में 2 मार्च, 2024 को यह मामला आया था। काेर्ट ने केस के जांचकर्ता पुलिस अधिकारी और पीड़िता को समन जारी किया था। 3 अगस्त को शिकायतकर्ता पेश हुई और कहा कि वह पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं है और अलग से शिकायत दायर करना चाहती है। हालांकि उसने कोई अलग से शिकायत कोर्ट में दायर नहीं की। ऐसे में कोर्ट ने मामला प्रिलिमिनरी एविडेंस पर लगा दिया जिसमें शिकायतकर्ता को एविडेंस पेश करने थे। कोर्ट ने उसे एविडेंस रखने के लिए कई वसर दिए मगर वह नहीं आई। केस फाइल से पता चला कि वह सिर्फ 2 बार 30 और 31 अगस्त, 2024 काे कोर्ट आई। जिसके बाद 4 दिसंबर को कोर्ट ने एविडेंस क्लोज कर दी।




