प्रोग्रेसिव सोसाइटी के 7 सीनियर सिटीजंस को कोर्ट ने दी अग्रिम जमानत, बुलाए जाने पर जांच में पेश होने के आदेश

चंडीगढ़। डीसी आदेशों की कथित रूप से उल्लंघना कर एक सोसाइटी के समानांतर एक धार्मिक सोसाइटी चला धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों से जुटाए जाने वाली रकम के कथित घपले के मामले में एडिशनल सेशंस जज की कोर्ट ने प्रोग्रेसिव सोसाइटी, सेक्टर-50बी के सुरेंद्र कुमार शर्मा(67),एपी सिंह(80), अमिता बावा(68), तरलोचन सिंह बैदवान(69), सतबीर सिंह सचदेव(58), गुलजार सिंह(75) व मोहाली फेज-1 के रविंदर सिंह(62) को अग्रिम जमानत दे दी है। सेक्टर-49 थाने में 29 अक्टूबर को धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में यह केस दर्ज हुआ था। कोर्ट ने कहा कि आरोप के मुताबिक अगस्त, 2018 में प्रोग्रेसिव सर्व धर्म रिलीजियस अफेयर कमेटी बनाई गई।

शिकायतकर्ता के बयानों में घपले वाली रकम का जिक्र नहीं है। केस दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है। आरोपियों का निश्चित रोल नहीं बताया गया है। सभी आरोपी सीनियर सिटिजन हैं और कोई पुराना क्रिमिनल रिकार्ड नहीं है। लगाए गए आरोपों को ट्रायल कोर्ट में साबित किया जाना है। जिसमें समय लगेगा। ऐसे में एडिशनल सेशंस जज की कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत अर्जियां मंजूर की गई। इनमें जांचकर्ता अफसर द्वारा बुलाए जाने पर जांच में शामिल होने की शर्त भी है।

बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट अभय भारद्वाज, सुनील दीक्षित व अन्यों ने दलीलें पेश करते हुए कहा था कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कोई अपराध नहीं किया। राजनीतिक द्वेष के चलते शिकायतकर्ता हरीश खन्ना ने झूठी शिकायत पुलिस को देते हुए एफआईआर दर्ज करवा दी। जबकि आरोपियों के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं है। अच्छे से खातों का प्रबंधन कर रकम को आयोजनों व सोसाइटी के कल्याण में इस्तेमाल किया गया।वहीं पब्लिक प्रोसिक्यूटर के मुताबिक डीसी आर्डर की उल्लंघना कर समानांतर सोसाइटी बनाई गई थी। सोसाइटी मेंबर से भारी रकम लेकर उसका उचित रिकार्ड नहीं रखा जा रहा था। उस रकम का घपला किया गया।

जमानत अर्जी में शिकायतकर्ता पर ही आरोप लगाए:
कहा गया कि शिकायतकर्ता हरीश खन्ना 2003 में मैनेजिंग कमेटी के मेंबर थे। उन्होंने 1991 की स्कीम की योग्यता संबंधी शर्तों की उल्लंघना करते हुए 8 फ्लैट्स कुछ लाेगों को अलॉट किए थे। वह अलॉटमेंट कैंसिल हो गई थी जिसे उन अलॉटियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उस याचिका समेत उसकी अपील को भी हाईकोर्ट ने जुलाई, 2010 व नवंबर, 2011 में रद्द कर दिया था। उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई जिसके बाद केस फिर हाईकोर्ट डबल बैंच पहुंचा जहां से फिर मार्च, 2020 में केस रद्द हो गया। उस फैसले को फिर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई जो अभी तक पेंडिंग है। उन 8 अलॉटमेंट को लेकर सेक्टर-34 थाने में हरीश खन्ना के खिलाफ सितंबर, 2007 में एफआईआर हुई थी। वह 2003-06 तक जनरल सेक्रेटरी व प्रेजीडेंट रहा था। इसके बाद जनवरी, 2020 में फिर से जनरल सेक्रेटरी रहे। उस दौरान कमेटी मेंबर्स को उन 8 अलॉटियों का सपोर्ट करने को कहा। हालांकि ज्यादातर ने इसका विरोध किया। विवाद पैदा होने पर प्रेजीडेंट सतीश चंद्रा ने हाउस भंग कर दिया था।

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