गुरूद्वारे का बाबा व अन्य फर्जी जीपीए के आधार पर 1.20 करोड़ जमीन का सौदा करने के मामले में बरी

चंडीगढ़। सुखना लेक से सटे गुरूद्वारा गुरसागर साहिब से जुड़े बाबा प्रीतपाल सिंह समेत सेक्टर-22सी के जतिंदर पाल सिंह को ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट रूबीना जोसन की कोर्ट ने प्राेसिक्यूशन केस साबित न होने पर 17 साल पुराने धोखाधड़ी-जालसाजी के मामले में बरी कर दिया। केस में एक महिला के फर्जी दस्तखत के आधार पर उसकी जमीन आगे एक कंपनी को बेचने के आरोप थे। सेक्टर-3 थाने में 20 मई, 2008 काे धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में यह केस दर्ज हुआ था। बाबा प्रीतपाल सिंह की ओर से एडवोकेट हरीश भारद्वाज ने दलीलें पेश कर पुलिस केस पर सवाल खड़े किए थे। वहीं जतिंदर पाल की ओर से एडवोकेट कैलाश चंद्र पैरवी कर रहे थे। पुलिस ने जुलाई, 2009 में जतिंदर पाल को गिरफ्तार करते हुए अगस्त, 2009 में कोर्ट में चालान पेश किया था।

इसके बाद बाबा प्रीतपाल की सर्च की गई व अक्तूबर, 2009 में उसे भगोड़ा कर दिया गया। जनवरी, 2020 को प्रीतपाल पकड़ा गया था। काेर्ट ने कहा कि प्राेसिक्यूशन शक के दायरे से बाहर जाकर केस साबित नहीं कर पाया। कमलजीत कौर से क्रॉस-एग्जामिनेशन में कहा कि उसके अपनी सिस्टर-इन-लॉ प्रभजीत कौर से अच्छे संबंध थे। कोर्ट ने कहा कि यह साबित हुआ है कि प्रभजीत कौर ने कर्नल इंद्रजीत सिंह, बलबीर कौर, सुदर्शन शुक्ला आदि के साथ 22 जुलाई, 2005 को जीपीए एग्जीक्यूट की थी। वहीं सब-रजिस्ट्रार ऑफिस कर्मी अशोक कुमार द्वारा पेश दस्तावेजों में आया कि सभी जीपीए निरतंर सीरियल नंबर में एक ही दिन में एग्जीक्यूट और रजिस्टर्ड हुई थी। अगर कमलजीत जीपीए एग्जीक्यूट करने के दौरान वहां न होती तो उसकी रिश्तेदार प्रभजीत कौर व बाकी फैमिली फ्रेंड्स ने आपत्ति जाहिर की होती। वहीं यह बात कमलजीत कौर की जानकारी में पहले ही ला दी होती।

कमलजीत कौर ने 2001 में विदेश जाने और 2007 में वापसी की बात कही मगर 22 जुलाई, 2005 में जीपीए एग्जीक्यूशन के वक्त अपनी प्लेस को लेकर दी गई दलीलों के स्पोर्ट में कोई दस्तावेज पेश नहीं किए। यही नहीं फोरेंसिक रिपोर्ट में भी किसी भी आरोपी द्वारा दस्तखत में फर्जी किए जाने को लेकर उनके लिए गए स्पेसीमेन सिग्नेचर को लेकर कोई निर्णायक राय नहीं दी गई थी।


1.20 करोड़ में कंपनी ने खरीदी थी जमीन:
केस में शिकायतकर्ता आरएएस भुल्लर थे। शिकायत के मुताबिक उनकी नई दिल्ली स्थित कंपनी एटीएस इंफ्रास्ट्रक्चर ने तहसील डेराबस्सी(पटियाला) के गांव माधोपुर में सितंबर, 2005 में जीपीए के आधार पर रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए 12 बीघा, 13 बिस्वास जमीन 1,20,17,500 रुपये में खरीदी थी। यह जमीन कमलजीत कौर के नाम पर दिखाई गई थी। इसका पोजेशन भी मिल गया था। शिरोमणि संत खालसा इंटरनेशनल फांउडेशन, गांव कैंबवाला के गुरूद्वारा गुरसागर सािहब के चेयरमैन संत बाबा प्रीतपाल सिंह द्वारा दी गई अटार्नी के आधार पर कंपनी के हक में म्यूटेशन भी हो गई थी। इसके बाद कंपनी को डेराबस्सी सब डिविजन के कलेक्टर ऑफिस से समन आ गए।

यह कमलजीत कौर की अपील में आए थे जिसमें उसने म्यूटेशन कैंसल करने की मांग की थी। वहीं केस दर्ज किए जाने की मांग करते हुए कहा कि उसने कभी बाबा प्रीतपाल सिंह के नाम जीपीए नहीं की थी। जब की जीपीए बताई गई तब वह इंडिया में ही नहीं थी। इस जीपीए तैयार किए जाने को धाेखाधड़ी, जालसाजी बताया गया और कहा कि बिना उनकी जानकारी और अथाॅरिटी के उनकी जमीन बेच दी गई। केस के मुताबिक जेपी सिंह और इंद्रपील सिंह की मौजूदगी में यह जीपीए तैयार की गई और सब-रजिस्ट्रार, यूटी ने इसे रजिस्टर्ड किया था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी।

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