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चंडीगढ़। एक बड़ा ड्रग सिंडिकेट अफगानिस्तान व इरान ने बड़ी मात्रा में हेरोइन दिल्ली समेत पंजाब व हरियाणा में सप्लाई के लिए पहुंचा रहा था। इस सिंडिकेट के 6 अहम सदस्यों को इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट(ईडी) ने गिरफ्तार किया है। एक मनी लांडरिंग की जांच के दौरान इस रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। ईडी ने बताया कि यह रैकेट अफगानिस्तान से भारत तक चल रहा था। ईडी ने पहले लवजीत सिंह उर्फ लब्बा और मंजीत सिंह उर्फ मन्ना को मनी लांडरिंग से जुड़े मामले में 11अक्तूबर को हिरासत मंे लिया था। जिसके बाद प्रभजीत सिंह, गुरजोत सिंह, रमनजीत सिंह को 18 अक्तूबर को गिरफ्तार किया गया। वहीं गुरप्रीत सिंह की गिरफ्तारी 20 तारीख को हुई। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस की शिकायत पर मनी लांडरिंग केस की जांच शुरू हुई थी जिसकी जांच में ड्रग रैकेट सामने आया है।
दिल्ली पुलिस ने मुंबई के नहावा शेवा पोर्ट से कंटेनर्स से 293.81 किलाे हेरोइन बरामद की थी। इसे संधू एक्सपोर्ट नामक कंपनी ने आयात करवाया था। वहीं फरीदाबाद के एक घर और 2 कारों से कुछ समय पहले 352.71 किलो हेरोइन भी बरामद की गई थी। ईडी के मुताबिक संधू एक्सप्रेस के नाम से दर्ज कंपनी के जरिए यह ड्रग तस्करी का धंधा चल रहा था जिसका मालिक प्रभजीत सिंह है। ईडी के मुताबिक पकड़े गए आरोपी पंजाब, हरियाणा व दिल्ली में हेरोइन की तस्करी, स्टोरेज व वितरण के कार्डिनेशन से जुड़े हुए थे। आरोपियों ने ड्रग तस्करी के लिए सेकंड हैंड मार्किट से टाेयोटा, फार्चुनर, इटियोस, हुंडई वरणा जैसी गाड़ियां खरीदी हुई थी। वहीं ड्रग मनी से महंगे स्मार्टफोन भी खरीदे गए थे। यह ड्रग तस्करी को लेकर गुप्त रूप से एप्स के जरिए आपस में संपर्क करते थे।
मुंबई के पोर्ट से डिलिवरी के बाद शिवपुरी के गोदाम तक पहुंचता था ड्रग:
ईडी के मुताबिक इरान व अफगानिस्तान से मुंबई के संबंधित एयरपोर्ट का इस्तेमाल होता था। जिसके बाद ड्रग को शिपपुरी, मध्यप्रदेश के एक किराए के गोदाम में रखवा दिया जाता था। उसके बाद दिल्ली, हरियाणा व पंजाब में पहुंचाया जाता था। पुलिस से बचने के लिए 10 किलो से कम मात्रा में ड्रग सप्लाई की जाती थी। आरोपी अफगानिस्तान व इरान से हेरोइन की तस्करी कर टाक स्टोन व जिप्सम पाउडर की शिपमेंट में छुपा देते थे। आरोपी अवैध फंड का इस्तेमाल बाद में वैध वित्तिय गतिविधियों में करते थे। वहीं सिंडिकेट अफगान के सप्लायर्स को तब तक पेमेंट नहीं देते थे जब तक ड्रग स्थानीय बाजार में बिक नहीं जाता था।




