हिमाचल सरकार के पूर्व ज्वाइंट डायरेक्टर पर करप्शन केस चलेगा या नहीं यह आपराधिक साजिश रचने की धारा में सुनवाई करेगी तय

चंडीगढ़। हिमाचल सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रीज के तत्कालीन ज्वाइंट डायरेक्टर तिलक राज शर्मा पर 5 लाख रुपये रिश्वतकांड का केस चलेगा या नहीं, इसका फैसला आपराधिक साजिश रचने की धारा के तहत चार्ज फ्रेम हो सकते हैं या नहीं, इस मुद्दे पर सुनवाई के बाद होगा। 7 साल पुराने केस में हिमाचल सरकार ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का केस चलाने की मंजूरी(प्रोसिक्यूशन सेंक्शन) को लेकर सीबीआई की मांग 2 बार ठुकरा दी थी। जिसके बाद सीबीआई ने उन्हें आरोपमुक्त करने की मांग सीबीआई कोर्ट से करते हुए अर्जी दायर की। वहीं जब शिकायतकर्ता ने एतराज जताया तो सीबीआई काउंसिल नरिंदर सिंह ने कहा कि करप्शन एक्ट के अलावा चार्जशीट में दोनों आरोपियों पर आपराधिक साजिश की धारा है। ऐसे में तिलक राज पर आपराधिक साजिश की धारा के तहत केस चलाया जाना चाहिए। जिस पर कोर्ट ने कहा है कि आरोपी पर आपराधिक साजिश की धारा के तहत आरोप तय किए जा सकते हैं या नहीं, इस पर सुनवाई के बाद ही तिलक राज को आरोपमुक्त की मांग पर विचार किया जाएगा।

सीबीआई ने 5 लाख रुपये रिश्वत मामले में तिलक राज और अशोक राणा को मई, 2017 में गिरफ्तार किया था। 27 मई, 2017 को बद्दी की एक फार्मा कंपनी के सीए-कम-कंसलटेंट चंद्र शेखर ने सीबीआई को शिकायत दी थी। इसके मुताबिक सब्सिडी के लिए फाइल के ऑफिस में जमा करवाई गई थी। यहां तत्कालीन ज्वाइंट डायरेक्टर तिलक राज ने सब्सिडी के लिए शिकायतकर्ता को एक अशोक राणा से संपर्क करने को कहा। शुरू में रिश्वत की रकम 10 लाख थी मगर आरोपी शुरू में 5 लाख रुपये लेने के लिए राजी हो गए। 29 मई, 2017 को सीबीआई ने ट्रैप लगा कर दोनों आरोपियों को 5 लाख रुपये रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार करने का दावा किया था। पूरी जांच के बाद 28 जुलाई, 2017 को चार्जशीट कोर्ट में सौंपी गई थी।

इस तरह चलती रही 7 सालों में सुनवाई:
तिलक राज ने 8 दिसंबर, 2023 के एक आर्डर का हवाला देते हुए खुद को केस में आरोपमुक्त करने की अर्जी दायर की थी। आरोप तय की कार्रवाई से पहले आरोपी तिलक राज ने 30 अक्तूबर, 2017 को कोर्ट में बताया कि हिमाचल सरकार ने उसके खिलाफ केस चलाने की मंजूरी की मांग रद्द कर दी है। इसके बाद 18 नवंबर, 2017 को अर्जी दायर कर उसे आरोपमुक्त करने की मांग की। इसके बाद सीबीआई ने 16 दिसंबर को अर्जी दायर कर आगामी जांच के लिए अर्जी दे दी। 12 मार्च, 2018 को सीबीआई जज ने सीबीआई अर्जी मंजूर कर तिलक राज की अर्जी रद्द कर दी थी। उस कोर्ट आर्डर पर हाईकोर्ट से 14 मई, 2018 को स्टे लग गई थी। 5 सितंबर, 2022 को सीबीआई ने कहा कि उनकी जांच पूरी हो चुकी है और केस चलाने की मंजूरी हिमाचल सरकार से मांगी गई है। 7 अगस्त, 2023 को सीबीआई ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की मगर स्वीकृति तब भी नहीं मिली थी। इसके बाद 31 अक्तूबर, 2023 को कोर्ट को बताया गया कि मंजूरी नहीं मिली है।

इसके बाद 8 दिसंबर, 2023 को कोर्ट ने सीबीआई से आरोपियों पर आगे की कार्रवाई के बारे में पूछा। जिस पर सीबीआई ने अर्जी दायर की जिसमें कहा कि तिलक राज के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी न मिलने पर उसे आरोपमुक्त करने अशोक पर निजी व्यक्ति के रूप में ट्रायल चलाने की मांग की गई। सीबीआई की आरोपमुक्त की मांग पर कोर्ट ने 21 मार्च को शिकायतकर्ता को नोटिस भेजा। 10 अप्रैल को पेश हो शिकायतकर्ता ने कहा कि वह तिलक राज को आरोपमुक्त करने से संतुष्ट नहीं है। इस पर वहीं शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि केस चलाने की मंजूरी रद्द होने का कोई आर्डर पेश नहीं हुआ है और सिर्फ सूचना दी गई है। वहीं तिलक राज के वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता ने मंजूरी न मिलने को चुनौती तक नहीं दी थी। ऐसे में उसे बहस का अधिकार नहीं है।

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