कोटखाई गुड़िया गैंगरेप आरोपी की 2017 के कस्टोडियल डेथ केस में 1994 बैच के आईपीएस जैदी समेत 8 पुलिसकर्मी दोषी

चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश के कोटखाई गुड़िया गैंगरेप केस में एक आरोपी की कस्टोडियल डेथ केस में प्रदेश के तत्कालीन आईजी 1994 बैच के आईपीएस अफसर जाहुर हैदर जैदी समेत कुल 8 पुलिसकर्मियों को चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट ने हत्या समेत विभिन्न आपराधिक धाराओं में दोषी करार दिया है। सभी ट्रायल के दौरान जमानत पर थे। दोपहर 2 बजे जैसे ही सीबीआई जज अल्का मलिक ने आरोपियों को दोषी करार दिया तभी पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया। इसके बाद इन्हें बख्शीखाने(कोर्ट में कैदियाें की कस्टडी) में भेज दिया गया और शाम 5 बजे सभी को बुड़ैल जेल भेज दिया गया। अब 27 जनवरी को इन पर सजा का एलान होगा।

वहीं कोर्ट ने एक आरोपी पूर्व एसपी डांडब वंगेल नेगी उर्फ डीडब्ल्यू नेगी को सबूतों अभाव में बरी हो गए। नेगी के वकील रबिंद्रा पंडित के मुताबिक उनका केस में कोई रोल नहीं था और उन्हें झूठा फंसाया गया था। जैदी के अलावा जिन्हें दोषी करार दिया गया है उनमें डीएसपी मनोज जोशी, संबंधित थाने के तत्कालीन एसएचओ एसआई राजिंदर सिंह, एससआई दीप चंद शर्मा, हेड कांस्टेबल रफी मोहम्मद, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, हेड कांस्टेबल मोहन लाल व कांस्टेबल रंजीत स्टेटा शामिल हैं। इनके खिलाफ सीबीआई ने आईपीसी की धारा 302, 330, 331, 348, 323, 326, 218, 195, 196, 201, 330 व 120-बी के तहत केस दर्ज किया था।

मामला:
केस के मुताबिक 16 साल की स्टूडेंट कोटखाई में 4 जुलाई, 2017 को लापता हो गई थी और दो दिन बाद 6 जुलाई को उसकी लाश हलैला के जंगली क्षेत्र में मिली थी। पोस्टमास्टम रिपोर्ट में उसके साथ रेप की पुष्टि हुई थी। जिसे लेकर पुलिस ने हत्या, रेप व पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। इस घटना से स्थानीय लोगों समेत राज्य भर में गुस्सा फूटा था। ऐसे में गवर्नमेंट द्वारा तत्कालीन आईजी जैदी की अध्यक्षता में एक स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम(एसआईटी) का गठन किया गया था। एसआईटी ने कुल 6 आरोपी गिरफ्तार किए थे। वहीं इनमें से एक आरोपी सूरज की पुलिस कस्टडी में 18 जुलाई, 2017 को शिमला के कोटखाई पुलिस थाने में मौत हो गई थी। गैंगरेप-मर्डर समेत कस्टोडियल डेथ केस की जांच शिमला हाईकोर्ट ने सीबीआई को मार्क कर दी थी।


कस्टोडियल डेथ केस में 22 जुलाई, 2017 को केस दर्ज कर जैदी समेत बाकी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2019 में कस्टोडियल डेथ केस को चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया था। जांच पूरी होने पर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर हुई और कोर्ट ने प्रथम दृष्टता में आरोप बनते देख चार्ज फ्रेम कर ट्रायल शुरू किया था। जानकारी के मुताबिक केस में सीबीआई ने प्राेसिक्यूशन के 52 गवाहों के बयान दर्ज करवाए थे।


सीबीआई केस के मुताबिक आरोपी पुलिसकर्मियों ने गैंगरेप के आरोपी सूरज समे बाकी आरोपियों की कस्टडी में बुरी तरह पिटाई की और उसे गंभीर रूप से जख्मी कर दिया। इन पर आरोप कबूल करने का दबाव बनाया गया और सीनियर अफसरों को फर्जी रिपोट्स तैयार कर दी गई थी। वहीं सूरज सिंह के टार्चर से हुई मौत के सबूत भी पुलिस ने नष्ट किए। सूरज की मेडिकल रिपोर्ट में उसके शरीर पर 20 चोटें पाई गई थी। एम्स की रिपोर्ट में टार्चर की पुष्टि हुई थी।


जैदी की पहली जमानत आईपीएस ने करवाई थी खारिज:
जैदी को 29 अगस्त, 2017 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। लगभग 19 महीने की कस्टडी काटने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से 5अप्रैल, 2019 को जमानत मिली थी। हालांकि 24 जनवरी, 2020 को उनकी जमानत सीबीआई कोर्ट ने खारिज कर दी थी। दरअसल एक महिला आईपीएस ने आरोप लगाए थे कि जैदी उन पर अपनी स्टेटमेंट बदलने का दबाव बना रहे थे। हालांकि बाद में अक्तूबर, 2022 में उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। जैदी को जनवरी, 2020 में सस्पेंड कर दिया गया था और जनवरी 2023 मेें उनकी सेवाएं बहाल की गई थी।

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