चंडीगढ़। हरियाणा-पंजाब में कई क्रिमिनल केसों में वांटेड, कुछ दिन पहले सेक्टर-23 में हुए कशिश हत्याकांड का आरोपी लारेंस गैंग का एक्टिव मेंबर गगनदीप उर्फ गगन(अब बुड़ैल जेल में बंद) नशे का आदी था और रोज हेरोइन और क्रैंक(कोको) बॉल्स का सेवन करता था जो सेक्टर 38(वेस्ट) की बाला से लेता था। वहीं बाला ने उसे अपने पड़ोसी पर फायरिंग को कहा था जिसे लेकर उसे पैसे भी दिए। इसके बाद से फ्री में उसे हेरोइन और क्रैंक देने लग गई थी। यही नहीं कथित तौर पर गैरकानूनी रूप से इमीग्रेशन बिजनेस चलाने वाला नीरज उर्फ निंजा लारेंस व यूएस के क्रिमिनल पटवारी के साथ जुड़े गगनदीप के संपर्क में था। दोनों गैंग के रूप में काम करते हुए इमीग्रेशन एजेंसी के मालिकों से पैसे वसूलते थे। वह अपने साथियों के साथ मिल संगठित क्राइम सिंडिकेट चला रहे थे। उन कामों से पैसे जुटा पाकिस्तान से उन्होंने हथियार भी खरीदे थे।
यह अहम जानकारी सेक्टर-34 थाने में 21 अक्तूबर, 2024 को दर्ज आपराधिक केस में आरोपी बाला की अग्रिम जमानत अर्जी के विरोध में पुलिस ने कोर्ट को दी है। जानबूझकर चोट पहुंचाने, गैरकानूनी रूप से जुटने, दंगा करने, प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने और आपराधिक रूप से धमकाने की धाराओं में दर्ज इस केस में एडिशनल सेशंस जज संजय संधीर की कोर्ट ने बाला की जमानत अर्जी खारिज की है। इस केस में मलकीत सिंह शिकायतकर्ता थे। 6 से 7 आरोपी उनके सेक्टर-34 इमीग्रेशन ऑफिस में घुस गए थे। यहां तोड़फोड़ कर धमकाया था। मामले में आरोपी नीरज उर्फ निंजा को 25 व गगनदीप को 27 जनवरी को माेहाली में एक फ्लैट से हथियारों समेत पकड़ा गया था। पुलिस के मुताबिक वह फर्जी पासपोर्ट के आधार पर विदेश भागने की फिराक में था।
40 आपराधिक केसों में शामिल 57 साल की बाला:
57 साल की बाला ने अर्जी में कहा था कि पुलिस ने उसे कई झूठे केसों में फंसाया। नवंबर, 2020 में दर्ज एक एनडीपीएस केस में वह 30 जनवरी, 2024 को बरी हुई थी। उसकी बेटी ने पुलिसकर्मियाें के खिलाफ कोर्ट में एक शिकायत भी दे रखी है जो पेंडिंग है। पुलिसकर्मी उसे इस केस में भी फंसाने की धमकियां दे रहे थे। उसका इस मामले में कोई रोल नहीं है। वहीं पुलिस ने कहा कि बाला गैरकानूनी रूप से ड्रग के धंधे से जुड़ी हुई है। 23 अक्तूबर को उसके घर रेड में हेरोइन व 5 लाख रुपये मिले थे। वह 40 आपराधिक केसों में शामिल है। पुलिस ने कहा था कि बाला का रोल संगठित अपराध को प्रोत्साहित करने और मदद पहुंचाने की दिशा में जांचना है। कोर्ट ने केस के तथ्यों व परिस्थितियों को देख बाला की अग्रिम जमानत अर्जी रद्द कर दी।




