चंडीगढ़। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक पति को “क्रूरता’ के आधार पर उसकी तलाक की याचिका काे मंजूर कर लिया है। पति ने हिंदू मेरिज एक्ट के तहत पत्नी से यह कहते हुए तलाक मांगा था कि उसकी पत्नी बच्चों की हत्या के मामले में दोषी ठहराई जा चुकी है। हाईकोर्ट की डबल बैंच ने तलाक मंजूर करते हुए कहा कि अपीलकर्ता(पति) की पत्नी को बच्चों की हत्या में उम्रकैद की सजा हुई थी। बच्चों की मौत से पति को मानसिक पीड़ा हुई और उसे शंका है कि वह पत्नी के साथ सुरक्षित नहीं है और यह स्पष्ट रूप से क्रूरता के समान है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी की 9 साल की लंबी जेल से पति को वैवाहिक रिश्ते से वंचित रहना पड़ा। यही नहीं, पति को समाज में शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। सोनीपत की फैमिली काेर्ट के जुलाई, 2013 के आर्डर के खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में यह अपील दायर की थी। फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी रद्द कर दी थी।
कोर्ट ने कहा कि हालांकि हत्या मामले में सजा होने को हिंदू मेरिज एक्ट के तहत विशेष रूप से तलाक का आधार नहीं बनाया जा सकता। मगर यह निश्चित रूप से मानसिक क्रूरता के समान है क्योंकि हत्या मामले में (पत्नी के) जेल काटने से (पति को)वैवाहिक संबधों, भोजन, शेल्टर और सुरक्षा की भावना से वंचित रहना पड़ा। वहीं यह एक पार्टनर द्वारा दूसरे के साथ रहने के दौरान मानसिक पीड़ा, शोषण और चोट पहुंचाए जाने की शंका से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि क्रूरता जारी रहेगी जब तक इस रिश्ते को खत्म नहीं कर दिया जाता। विवाह का खत्म करना न्यायहित में होगा ताकि अपीलकर्ता के कष्ट को खत्म किया जा सके और वह अपनी जिंदगी जी सके।
हाईकोर्ट को यह भी बताया गया था कि दंपति की पढ़ाई में अंतर होने के चलते अक्सर झगड़े भी होते थे। दलील दी गई थी कि पत्नी रिश्ता तोड़ना चाहती थी मगर बच्चे इसमें एक बाधा थे। ऐसे में उसने बच्चों को मार दिया था। 2003 में दंपति की शादी हुई थी। इससे अपीलकर्ता के बेटा और बेटी हुई थी। 2010 में उसकी पत्नी ने दोनों बच्चों को मार दिया था। ट्रायल कोर्ट ने जुलाई, 2011 में उसे दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं हाईकोर्ट से सजा सस्पेंड कर दी थी।




