चंडीगढ़। हरियाणा के हेल्थ विभाग में दवाइयां और उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले मामले में फरवरी, 2020 में दायर शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से जुड़ी याचिका में हाईकोर्ट की डबल बैंच ने सरकार को एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं केस की अगली सुनवाई पर जवाब दायर करने का अंतिम मौका दिया है। इससे पहले सरकार को आदेश दिया था कि राज्य के सक्षम प्राधिकारी शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में कानून के तहत कार्रवाई की सिफारिश करने या अस्वीकार करने का निर्देश जारी करें। वहीं हाईकोर्ट रजिस्ट्री में जवाब दायर करने का आदेश दिया था। हालांकि हाईकोर्ट आर्डर के बाद भी सरकार की मामले में भी जवाब दायर नहीं किया।
मामले में जगविंद्र सिंह कुल्हरिया ने यह याचिका दायर की थी। दावे के मुताबिक 3 सालों में राज्य के सरकारी अस्पतालों में कई करोड़ रुपये की दवाएं और मेडिकल उपकरण बेहद महंगे दामों में खरीदे गए थे। वहीं याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया था कि हिसार की एक दवा कंपनी, जिस एड्रेस पर दर्ज है, वहां फर्म की जगह एक धोबी बैठा मिला था। हिसार और फतेहाबाद के सामान्य अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों की सप्लाई करने वाली फर्म का मालिक नकली सिक्के बनाने के आरोप में तिहाड़ जेल में था। उसने न केवल जेल से ही टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मी ने उसके झूठे हस्ताक्षर किए।
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट को बताया कि दवा और उपकरण सप्लाई करने वाली बहुत सी कंपनियों के पास लाइसेंस ही नहीं था। जिलों के सिविल सर्जनों ने ना केवल दवाइयां और उपकरण महंगे दामों में खरीदे, बल्कि ऐसी कंपनियों से दवाओं की खरीद कर ली, जो कागजों में करियाना और घी का कारोबार करती हैं। याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच ईडी से कराने की मांग कर रखी है।




