चंडीगढ़। मेवात के एक मुस्लिम प्रेमी जोड़े ने परिवार से जान को खतरा बता हाईकोर्ट से सुरक्षा मांगी थी। इस याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने जोड़े को एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि जानबूझकर कई तथ्य छिपाकर सुरक्षा मांगी नहीं जा सकती। सुरक्षा मांगने आए प्रेमी जोड़े में से जो व्यक्ति न सिर्फ शादीशुदा है, बल्कि 10 बच्चों का बाप भी है। वहीं जिस लड़की से शादी कर हाई कोर्ट से सुरक्षा मांगी गई है, वह लड़की इस व्यक्ति से 20 साल छोटी है। याचिका में आधार कार्ड लगाया गया था लेकिन लड़की का आधार कार्ड इस तरह लगाया गया कि लड़की पहचानी ही न जा सके। वहीं आधार कार्ड की जो काॅपी लगाई गई है वह बेहद ही काली थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह सामने नहीं आ रहा है कि याचिकाकर्ताओं को किसने और कब धमकी दी। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि याची के पास 40 एकड़ जमीन है, हालांकि, याचिका में यह लिखा गया कि वह एक मैकेनिक है और 55 हजार रुपये कमाता है। कोर्ट ने कहा कि व्यक्ति याचिकाकर्ता के अपनी पहली शादी से 10 बच्चे हैं और अब उसने एक ऐसी लड़की से शादी कर ली है जो उससे 20 साल छोटी है। हालांकि, यह कोर्ट याचिकाकर्ताओं की इच्छाओं के संबंध में विचार नहीं करने जा रहा है, लेकिन इस बारे में कुछ भी सामने नहीं आ रहा है कि याचिकाकर्ताओं को कब और किसने उनके जीवन और स्वतंत्रता को खतरे में डाला।
हाईकोर्ट ने कहा कि रिकार्ड पर रखे गए आधार कार्ड को देखने से पता चलता है कि यह पूरी तरह से अस्पष्ट है और महिला याचिकाकर्ता की पहचान छिपाने के लिए जानबूझकर किया गया कार्य प्रतीत होता है। याचिका में किसी भी तरह की धमकी की बात सामने नहीं आई है और यह किसी गुप्त उद्देश्य के लिए कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग या छिपाने का प्रयास प्रतीत होता है। इसलिए याचिका को इस शर्त के साथ खारिज किया जाता है कि याचिकाकर्ताओं को गरीब मरीज कल्याण कोष, पीजीआई , चंडीगढ़ में एक लाख रुपये का जुर्माना जमा कराना होगा। वहीं हाईकोर्ट ने लड़की की सुरक्षा पर गौर किए जाने के मेवात के एसपी को आदेश दे दिए हैं।




