चंडीगढ़। वर्ष 2019 के 2500 रुपये रिश्वतकांड में 25 हजार रुपये के श्योरिटी बांड पर जमानत पाने वाले नगर निगम के सेनिटरी इंस्पेक्टर नरेश को भ्रष्टाचार के इस मामले में एडिशनल सेशंस जज अश्वनी कुमार की कोर्ट ने 4 साल कैद व 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। सेक्टर-29 के नरेश के खिलाफ यूटी विजिलेंस ने 17 अगस्त, 2019 को प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। सितंबर, 2029 में आरोपी को 25 हजार रुपये के बेल बांड पर जमानत दी गई थी। केस में शिकायतकर्ता एमओएच(नगर निगम) में कांट्रेक्ट कर्मी अजय था। वह सेनिटरी इंस्पेक्टर नरेश के अंडर सेक्टर-29 में स्वीपर था। उसकी हार्टिकल्चर विभाग में ट्रांसफर हो गई थी। उसे दोबारा सेक्टर-29 में लाने के लिए आरोपी ने 2500 रुपये रिश्वत मांगी थी। रिश्वत की बातचीत शिकायतकर्ता ने मोबाइल में रिकार्ड कर ली थी। इसके बाद विजिलेंस ने सेक्टर-29ए के ग्राउंड एरिया में ट्रैप लगा कर आरोपी को रिश्वत की रकम के साथ दबोचा था।
भ्रष्टाचार कैंसर के समान, जिसके विनाशकारी परिणाम होंगे: कोर्ट
कोर्ट ने केस के तथ्यों व परिस्थितियों को देख कहा कि दोषी पर रहम नहीं दिखाया जा सकता। एक सभ्य समाज में भ्रष्टाचार कैंसर जैसी बीमारी है, जो यदि समय पर पता नहीं चली और ठीक नहीं की गई, तो निश्चित रूप से हमारे देश की राजनीति को घातक रूप से दूषित कर देगी, जिसके विनाशकारी परिणाम होंगे। यह समाज में इस हद तक प्रवेश कर चुका है कि कई लोग सोचते हैं कि इससे बचा नहीं जा सकता। कई लोग इसे सामान्य मानते हैं, अनैतिक नहीं, और यह परेशान करने वाली बात है। भ्रष्टाचारियों ने व्यवस्था को अपने अनुकूल मोड़ लिया है और फल-फूल रहे हैं। कई लोग समृद्ध हुए हैं। भ्रष्टाचार एक सामाजिक बुराई है, जिसने समाज में न्याय और निष्पक्षता की प्रयोज्यता को मिटा दिया है। दोषी जैसे व्यक्ति भ्रष्टाचार को प्रोत्साहित करते हैं और सोचते हैं कि वे सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत देकर हर काम करवा सकते हैं। यदि दोषी के प्रति कोई नरमी दिखाई जाती है, तो यह समाज में गलत संकेत भेज सकता है।



