पिता अन्याय के खिलाफ लड़ते थे, एथलेटिक्स में गोल्ड जीती, इंजरी से व्हील चेयर पर मगर हार नहीं मानी

चंडीगढ़|

मेरे पिता चाइल्ड ट्रेफिकिंग, देह व्यापार, भू-माफिया के खिलाफ लड़ते थे। मुझे यौन शोषण से बचाते हुए उनकी डंडों से पिटाई के चलते जान चली गई थी। उनकी मौत के बाद भी मेरी इस हालत के बावजूद मुझे लगातार कुछ लोग परेशान कर रहे हैं जिसके खिलाफ मैंने दिल्ली हाईकोर्ट में केस भी दायर किया था। जिसमें इसी साल मेरे हक में फैसला आया। चंडीगढ़ में फ्यूचर लॉ: इनोवेट, इंटीग्रेट, इम्पैक्ट सेशन विषय पर शहर में दो दिन चली लीगल कन्क्लेव में व्हील चेयर पर पहुंची 37 वर्षीय तुष्टि चोपड़ा ने यह बात कही। उन्होंने यहां एआई व डिसएबिलिटी विषय पर अपने रिसर्च पेपर्स पेश किए। तुष्टि को 2019 में कई बार हुई स्पोर्ट्स इंजरी हो गई थी। उनके हाथ की अंगुलियां ढंग से काम नहीं कर पाती और शरीर का निचला हिस्सा भी काम नहीं करता। इसके बावजूद वह व्हील चेयर पर रहते हुए काम संभालती हैं और सोशल वर्क भी करती हैं।

वह नेशनल स्तर की इंटर मिनिस्ट्री मीट में एथलेटिक्स में गोल्ड व ब्रांज मेडल भी जीत चुकी हैं। उनकी कई पब्लिकेशंस छप चुकी हैं जिन्हें कई युनिवर्सिटी में पढ़ाया जाता है और सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें केसों की सुनवाई का हिस्सा बनाया है। कई स्कॉलरशिप व फेलोशिप ले चुकी तुष्टि जर्मनी की हेडलबर्ग युनिवर्सिटी में गेस्ट लेक्चरर भी रह चुकी हैं।

रिसर्चर के साथ-साथ लेक्चरर भी
तुष्टि मिनिस्ट्री आफ लॉ एंड जस्टिस, भारत सरकार में कार्यरत हैं और रिसर्चर भी हैं। वह दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ फैकल्टी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाती भी हैं। साथ ही वकालत भी कर रही हैं। यही नहीं वह युनस्को की लीगल एक्सपर्ट भी हैं। उन्होंने एलएमबी, एलएलएम की पढ़ाई के साथ ही मास कम्यूनिकेशन में मास्टर की है। वहीं फोरेंसिक साईंस में डिप्लोमा होल्डर भी हैं।

अपने अधिकारों के लिए हाईकोर्ट गई थी
तुष्टि दिव्यांगता व अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें झेल रही हैं। उन्होंने पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट में एक क्रिमिनल केस दायर किया था जिसमें उन्होने कुछ लोगों पर उन्हें सम्मान के साथ जीने के अधिकार से वंचित रखते हुए मूलभूत जरूरतों से वंचित करने के आरोप लगा सुरक्षा की मांग व उचित कानूनी कार्रवाई मांगी थी। यािचका में कहा गया था कि उन्हें टार्चर, शोषण, अपमान और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। वहीं आश्रय के अधिकार से भी वंचित किया गया। दरअसल उनके घर पर कुछ लोगों ने कब्जा कर उसे बुरी तरह खराब कर दिया था। वहीं एक साल से बिजली भी नहीं मिल रही थी। हाईकोर्ट ने पुलिस को उनके मामले में कानून के तहत कार्रवाई करने व सुरक्षा मुहैया करवाने के इसी साल जनवरी में आदेश जारी किए थे।

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